देवरिया, ममता तिवारी | वेब वार्ता
उत्तर प्रदेश के देवरिया जनपद में मानवता को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है। यहां जन्म के महज एक दिन बाद एक नवजात बच्ची को झाड़ी में फेंक दिया गया, जहां ठंड और चोटों के कारण उसकी मौत हो गई। सोमवार को बच्ची का पोस्टमार्टम कराया गया, जिसमें उसकी मौत की पुष्टि हुई। घटना ने पूरे इलाके में आक्रोश और गहरी संवेदना का माहौल पैदा कर दिया है।
झाड़ी में मिला नवजात का शव, पुलिस को दी गई सूचना
जानकारी के अनुसार, देवरिया शहर के संत विनोबा पीजी कॉलेज के समीप स्थित झाड़ी में स्थानीय लोगों ने एक नवजात बच्ची को पड़ा देखा। इसकी सूचना तत्काल पुलिस को दी गई। पुलिस मौके पर पहुंची और बच्ची को मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में क्या आया सामने
चिकित्सकों के अनुसार, मृत नवजात बच्ची की उम्र लगभग एक दिन थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह सामने आया कि बच्ची को जन्म के बाद ठंड में झाड़ी में फेंका गया, जिससे उसकी मौत हुई। इसके अलावा बच्ची के सिर के पीछे चोट के निशान भी पाए गए हैं, जो झाड़ी में फेंकने के दौरान लगने की आशंका जताई जा रही है।
लिंग के आधार पर हत्या की आशंका
प्रारंभिक जांच में यह आशंका जताई जा रही है कि बच्ची की मां ने उसे पूरे नौ माह तक गर्भ में पाला, लेकिन प्रसव के दौरान जब पता चला कि नवजात लड़की है, तो उसे अपनाने के बजाय फेंक दिया गया। संभावना व्यक्त की जा रही है कि परिवार में पहले से कई बेटियां होने और पुत्र की चाहत के चलते यह अमानवीय कदम उठाया गया।
पुलिस जांच में जुटी, मां की तलाश जारी
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| घटना स्थल | संत विनोबा पीजी कॉलेज के पास, देवरिया |
| नवजात की आयु | लगभग 1 दिन |
| मौत का कारण | ठंड व सिर में चोट |
| कार्रवाई | पोस्टमार्टम, पुलिस जांच जारी |
देवरिया सदर कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक विनोद कुमार सिंह ने बताया कि नवजात बच्ची का शव झाड़ी से बरामद हुआ था और पोस्टमार्टम कराया जा चुका है। फिलहाल पुलिस बच्ची की मां और जिम्मेदार व्यक्ति की पहचान के लिए आसपास के इलाकों में जांच कर रही है।
समाज में गूंज रहा सवाल
यह घटना देवरिया में चर्चा का विषय बनी हुई है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि बेटी होने पर उसे मौत के घाट उतार देने वाली सोच आज भी समाज में क्यों जिंदा है। नवजात की मौत ने एक बार फिर बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ जैसे अभियानों की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
निष्कर्ष
देवरिया में नवजात बच्ची की यह दर्दनाक मौत न केवल एक अपराध है, बल्कि समाज के लिए आईना भी है। अब देखना यह होगा कि पुलिस इस मामले में दोषियों तक कितनी जल्दी पहुंच पाती है और क्या इस अमानवीय कृत्य के लिए जिम्मेदारों को कड़ी सजा मिल पाएगी।
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