देवरिया, ममता तिवारी | वेब वार्ता
उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में मकर संक्रांति के पावन अवसर पर गुरुवार को आस्था और श्रद्धा का अद्भुत नजारा देखने को मिला। बरहज क्षेत्र में सरयू और राप्ती नदी के तट पर तड़के सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। कड़ाके की ठंड के बावजूद लोगों ने उत्साह के साथ पवित्र नदियों में डुबकी लगाई और पुण्य अर्जित किया।
तड़के शुरू हुआ स्नान, गूंजे हर-हर महादेव के जयकारे
तड़के करीब चार बजे सरयू तट पर पूजन-अर्चन के बाद विधिवत सरयू आरती की गई, जिसके उपरांत स्नान का क्रम शुरू हुआ। जैसे ही श्रद्धालु नदी में उतरे, घाटों पर “हर-हर महादेव” के जयकारों से पूरा इलाका गूंज उठा। स्नान के दौरान भक्तों ने सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना की।
दान-पुण्य और सहभोज का आयोजन
स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने गरीबों और ब्राह्मणों को अन्न व वस्त्र दान कर पुण्य अर्जित किया। कई स्थानों पर सहभोज का भी आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने एक-दूसरे के साथ प्रसाद ग्रहण किया। मकर संक्रांति के अवसर पर दान-पुण्य को विशेष महत्व दिया जाता है, जिसे लेकर लोगों में खास उत्साह देखने को मिला।
- सरयू और राप्ती तट पर सुबह से दोपहर तक चला स्नान
- दान-पुण्य और सहभोज के आयोजन
- ठंड के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह बरकरार
- घाटों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
मेले जैसा माहौल, जमकर हुई खरीदारी
स्नान के बाद बरहज नगर में मेले जैसा माहौल नजर आया। श्रद्धालुओं ने सौंदर्य प्रसाधन, खिलौने, मिठाई और पूजा सामग्री की दुकानों से जमकर खरीदारी की। दुकानों पर लोगों की भीड़ लगी रही, जिससे पूरे क्षेत्र में उत्सव का माहौल बना रहा।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम, नाविक और गोताखोर तैनात
स्नान को लेकर प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। घाटों पर पुलिस बल के साथ-साथ नाविक और गोताखोरों की तैनाती की गई थी, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके। भीड़ को नियंत्रित करने और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगातार निगरानी की जा रही थी।
ठंड और बालू भी नहीं रोक सकी श्रद्धालुओं का उत्साह
कड़ाके की ठंड और बालू भरे रास्ते भी श्रद्धालुओं के उत्साह को नहीं रोक सके। घाटों तक पहुंचने के लिए कई लोगों को एक किलोमीटर तक रेत में पैदल चलना पड़ा, फिर भी आस्था में कोई कमी नहीं दिखी। रामपुर कारखाना से स्नान करने पहुंचे दंपती संतोष और संध्या देवी तथा महुआ पाटन की रेखा ने बताया कि खिचड़ी पर्व पर सरयू स्नान की उनकी लंबे समय से इच्छा थी, जो आज पूरी हो गई। उन्होंने कहा कि सरयू मां की कृपा से वे धन्य महसूस कर रहे हैं, हालांकि ठंड और बालू से कुछ परेशानी जरूर हुई।
निष्कर्ष: आस्था और उत्सव का संगम
कुल मिलाकर मकर संक्रांति के अवसर पर देवरिया में आस्था, परंपरा और उत्सव का सुंदर संगम देखने को मिला। सरयू और राप्ती तट पर श्रद्धालुओं की भीड़, दान-पुण्य और मेले जैसा माहौल इस पर्व की धार्मिक और सामाजिक महत्ता को दर्शाता है।
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