देवरिया, ममता तिवारी | वेब वार्ता
उत्तर प्रदेश के देवरिया जनपद में राजस्व अभिलेखों में कूटरचना कर बनाए गए अवैध मजार के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। इस पूरे प्रकरण में उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड, लखनऊ की आगामी कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। बताया जा रहा है कि अवैध रूप से निर्मित मजार के शेष हिस्से का भविष्य अब बोर्ड के निर्णय पर निर्भर करेगा। फिलहाल, बोर्ड की ओर से मजार और कब्रिस्तान को वक्फ संपत्ति की सूची से बाहर करने के संबंध में कोई आधिकारिक सूचना जारी नहीं की गई है।
मजार पक्ष का दावा, प्रशासन ने नहीं की पुष्टि
मजार से जुड़े पक्षकारों का कहना है कि वक्फ बोर्ड ने “वक्फ संपत्ति” होने के कारण ध्वस्तीकरण की कार्रवाई रोकने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, जिला प्रशासन ने इस दावे की पुष्टि नहीं की है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, मामले में अभी तक बोर्ड से कोई औपचारिक पत्र या आदेश प्राप्त नहीं हुआ है। वहीं स्थानीय स्तर पर इस विवाद को लेकर लोगों में चर्चा तेज़ है।
जिला प्रशासन ने वक्फ बोर्ड को भेजा पत्र
जिला प्रशासन की ओर से सोमवार को उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड, लखनऊ के मुख्य कार्यपालक अधिकारी को पत्र भेजा गया है। इसमें वक्फ संपत्तियों से संबंधित रजिस्टर दफा 37 में क्रमांक 19 पर दर्ज मेहड़ा स्थित वक्फ मजार व कब्रिस्तान को विलोपित (डिलीट) करने और संबंधित अभिलेखों में संशोधन कराने का अनुरोध किया गया है। प्रशासन का कहना है कि यह कदम अवैध निर्माण और राजस्व अभिलेखों की सत्यता को बनाए रखने के लिए आवश्यक है।
- देवरिया प्रशासन ने दो बार वक्फ बोर्ड को पत्र भेजा।
- पहला पत्र 20 नवंबर 2025 को जिलाधिकारी द्वारा भेजा गया था।
- दूसरा पत्र 15 दिसंबर 2025 को जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी ने भेजा।
पूर्व पत्राचार के बावजूद कार्रवाई लंबित
गौरतलब है कि 20 नवंबर 2025 को जिलाधिकारी ने इस मामले में वक्फ बोर्ड को पहला पत्र भेजा था, जिसमें इस संपत्ति को वक्फ सूची से हटाने की सिफारिश की गई थी। इसके बाद 15 दिसंबर 2025 को जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी ने भी बोर्ड को पत्राचार करते हुए मजार और कब्रिस्तान को सूची से बाहर करने का अनुरोध किया था। इसके बावजूद अब तक बोर्ड की ओर से कोई औपचारिक निर्णय नहीं लिया गया है, जिससे प्रशासनिक कार्रवाई अधर में अटकी हुई है।
निष्कर्ष: बोर्ड के निर्णय पर निर्भर अगला कदम
देवरिया का यह मामला अब वक्फ बोर्ड के औपचारिक निर्णय की प्रतीक्षा में है। यदि बोर्ड संपत्ति को सूची से हटाने का आदेश जारी करता है, तो प्रशासन आगे की कार्रवाई कर सकता है। लेकिन यदि बोर्ड इसे वक्फ संपत्ति घोषित रखता है, तो मामला कानूनी विवाद का रूप ले सकता है। फिलहाल, जनपद प्रशासन और स्थानीय नागरिक दोनों ही उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के अगले निर्णय की प्रतीक्षा कर रहे हैं।




