देवरिया, ममता तिवारी | वेब वार्ता
देवरिया शहर के गोरखपुर रोड पर ओवरब्रिज से सटे चर्चित अवैध मजार मामले में छह साल बाद गुरुवार को सुनवाई पूरी हो गई। नियत प्राधिकारी (एसडीएम सदर) श्रुति शर्मा की कोर्ट में करीब एक घंटे तक जोरदार बहस चली, जिसके बाद फैसला सुरक्षित रख लिया गया। कोर्ट परिसर में गहमागहमी का माहौल रहा और बड़ी संख्या में अधिवक्ता मौजूद रहे। यह मामला जलप्लावित एवं हरित क्षेत्र में अवैध निर्माण से जुड़ा है, जिस पर 2019 में भाजपा नेताओं ने शिकायत की थी। सुनवाई में मजार पक्ष और विनियमित क्षेत्र की ओर से तीखी दलीलें पेश की गईं। जल्द फैसला आने की संभावना है, जो जनता की लंबित शिकायत पर न्याय दिलाएगा।
सुनवाई का विवरण: जोरदार बहस, फैसला सुरक्षित
सुनवाई सुबह करीब 11:30 बजे शुरू हुई। मजार पक्ष की ओर से अधिवक्ता दिनेशनाथ त्रिपाठी ने दलीलें पेश कीं। विनियमित क्षेत्र की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता (राजस्व) नवनीत मालवीय ने पक्ष रखा। शिकायतकर्ता भाजपा नेताओं की ओर से जिला कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन अध्यक्ष ज्ञानेश्वर मिश्र प्रीतम के साथ मंत्री जयप्रकाश मिश्र और मुकुंद माधव ने बहस में हिस्सा लिया। मजार पक्ष की दलीलों का कड़ा विरोध हुआ, जिससे माहौल गर्म हो गया और कई अधिवक्ता कोर्ट कक्ष में एकत्र हो गए। एक घंटे की बहस के बाद एसडीएम सदर ने फैसला सुरक्षित रख लिया।
मामले की पृष्ठभूमि: 2019 की शिकायत से अब तक
यह मामला सरकारी भूमि पर अवैध मजार निर्माण से जुड़ा है। 2019 में भाजपा नेता नवीन सिंह, मारकंडेय तिवारी, अमरध्वज राय, धनुषधारी मणि, गोविंद चौरसिया, राजन यादव, अंबिकेश पांडेय और अभिजीत उपाध्याय आदि ने शिकायत की थी। तत्कालीन जिलाधिकारी अमित किशोर के निर्देश पर विनियमित क्षेत्र के जेई ने आरबीओ एक्ट धारा-10 के तहत वाद दाखिल किया, लेकिन पत्रावली दबा दी गई।
जून 2025 में सदर विधायक डॉ. शलभ मणि त्रिपाठी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शिकायत की कि कार्रवाई नहीं हो रही। उन्होंने 28 वर्ष पहले आरएसएस प्रचारक रामनगीना यादव की हत्या का जिक्र किया, जो मजार पर सवाल उठाने से जुड़ी थी। शिकायत पर एएसडीएम अवधेश निगम ने 1993 के कथित फर्जी परवाने को निरस्त कर भूमि को बंजर दर्ज किया। 2019 में जिलाधिकारी ने लोक निर्माण विभाग और सेतु निगम को निर्माण रोकने के निर्देश दिए, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।
प्रमुख बिंदु एक नजर में
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| स्थान | गोरखपुर रोड, ओवरब्रिज सटा मजार |
| सुनवाई तिथि | गुरुवार (9 जनवरी 2026) |
| प्राधिकारी | एसडीएम सदर श्रुति शर्मा |
| बहस अवधि | करीब 1 घंटा |
| मजार पक्ष अधिवक्ता | दिनेशनाथ त्रिपाठी |
| विनियमित क्षेत्र पक्ष | नवनीत मालवीय (जिला शासकीय अधिवक्ता) |
| शिकायतकर्ता पक्ष | ज्ञानेश्वर मिश्र प्रीतम आदि |
| फैसला | सुरक्षित |
यह तालिका मामले की मुख्य जानकारी को स्पष्ट करती है।
प्रशासन के प्रयास: पारदर्शी कार्रवाई
प्रशासन अवैध निर्माणों पर सख्ती बरत रहा है। सुनवाई से जनता को न्याय की उम्मीद है। फैसला आने पर कार्रवाई होगी।
निष्कर्ष: लंबित मामले में न्याय की उम्मीद
देवरिया के चर्चित मजार मामले में सुनवाई पूरी होना बड़ा कदम है। 6 साल बाद फैसला सुरक्षित रखा गया, जल्द निर्णय आने की संभावना है। यह जनता की शिकायत पर न्याय दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। प्रशासन की कार्रवाई से पारदर्शिता बढ़ेगी।




