देवरिया, नेशनल डेस्क | वेब वार्ता
देवरिया फोरलेन मुआवजा विवाद को लेकर जिले के सलेमपुर क्षेत्र में किसानों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। 24 फरवरी 2026 को बाईपास से नवलपुर होते हुए भागलपुर तक प्रस्तावित फोरलेन सड़क निर्माण के लिए अधिग्रहित भूमि का अब तक उचित मुआवजा न मिलने पर किसानों ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इसी क्रम में पूर्व विधायक स्वामीनाथ भाई के नेतृत्व में किसानों के प्रतिनिधिमंडल ने उपजिलाधिकारी दिशा श्रीवास्तव को ज्ञापन सौंपकर शीघ्र भुगतान की मांग की।
देवरिया फोरलेन मुआवजा विवाद को लेकर किसानों में बढ़ती नाराजगी
देवरिया फोरलेन मुआवजा विवाद पिछले कई महीनों से किसानों के लिए गंभीर समस्या बना हुआ है। किसानों का कहना है कि सरकार द्वारा भूमि अधिग्रहण किए जाने के बाद भी अब तक उन्हें उनकी जमीन का उचित मूल्य नहीं दिया गया है।
इस देरी के कारण किसानों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है और उनके परिवारों की आजीविका भी प्रभावित हो रही है।
पूर्व विधायक के नेतृत्व में सौंपा गया ज्ञापन
पूर्व विधायक स्वामीनाथ भाई के नेतृत्व में किसानों के प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को उपजिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में किसानों ने प्रशासन से मांग की कि जल्द से जल्द लंबित मुआवजे का भुगतान किया जाए, ताकि उन्हें राहत मिल सके।
26 फरवरी को धरना-प्रदर्शन की चेतावनी
देवरिया फोरलेन मुआवजा विवाद को लेकर पूर्व विधायक ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र समाधान नहीं किया गया, तो 26 फरवरी 2026 को दोपहर 12 बजे लक्ष्मण चौराहे पर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि यह आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण होगा, लेकिन प्रशासन की उदासीनता के खिलाफ मजबूती से आवाज उठाई जाएगी।
किसानों की प्रमुख मांगें
किसानों ने प्रशासन के समक्ष अपनी कई मांगें रखी हैं, जिनका शीघ्र समाधान किया जाना आवश्यक बताया गया है।
- लंबित मुआवजे का तत्काल भुगतान
- भूमि मूल्य का पुनर्मूल्यांकन
- भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता
- प्रभावित परिवारों को अतिरिक्त सहायता
ज्ञापन सौंपने वालों में ये रहे शामिल
ज्ञापन सौंपने के दौरान ग्राम प्रधान संजय यादव, गुलाब यादव, वीरेंद्र दूबे सहित अन्य किसान और स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।
सभी ने एक स्वर में प्रशासन से न्यायोचित कार्रवाई की मांग की।
प्रशासन से शीघ्र समाधान की उम्मीद
देवरिया फोरलेन मुआवजा विवाद को लेकर किसानों को उम्मीद है कि प्रशासन उनकी समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए जल्द समाधान करेगा।
किसानों का कहना है कि यदि समय रहते भुगतान हो गया, तो आंदोलन की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा प्रभाव
विशेषज्ञों का मानना है कि मुआवजा न मिलने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है। किसानों की आय में गिरावट आने से बाजार और स्थानीय व्यापार पर भी असर पड़ रहा है।
समयबद्ध भुगतान से इस स्थिति में सुधार संभव है।
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