देवरिया : महिला एवं बाल अपराधों में विशेष संवेदनशीलता बरतें, डीआईजी एस. चन्नप्पा के निर्देश

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देवरिया, संवाददाता | वेब वार्ता

देवरिया: गोरखपुर परिक्षेत्र के पुलिस उप महानिरीक्षक एस. चन्नप्पा ने सोमवार को यहां आयोजित अपराध गोष्ठी में पुलिस अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि महिला अपराध और बच्चों से संबंधित मामलों में विशेष संवेदनशीलता बरती जाए। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई, निष्पक्ष विवेचना और पीड़ितों को समयबद्ध न्याय दिलाना पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

गंभीर अपराधों की समीक्षा में दिए सख्त निर्देश

डीआईजी चन्नप्पा ने देवरिया जिले में हाल ही में घटित गंभीर एवं संवेदनशील अपराधों की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि हत्या, लूट, डकैती, बलात्कार, चोरी और नकबजनी जैसे अपराधों में तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि विवेचना की गुणवत्ता में किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

साइबर अपराध और अवैध कारोबार पर सघन अभियान

डीआईजी ने निर्देश दिया कि साइबर अपराध, एनडीपीएस एक्ट, गौ-तस्करी, अवैध शराब, जुआ और सट्टेबाजी जैसे अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए थाना स्तर पर सघन अभियान चलाया जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि विवेचनाओं को समयबद्ध, निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित तरीके से पूरा किया जाए और चार्जशीट निर्धारित समय सीमा में प्रस्तुत की जाए।

सोशल मीडिया पर निगरानी सुदृढ़ करने के निर्देश

डीआईजी एस. चन्नप्पा ने कहा कि सोशल मीडिया पर अफवाहों के प्रसार को रोकने के लिए निगरानी तंत्र को और सुदृढ़ किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि फर्जी खबरें फैलाने वालों पर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए और जनता के बीच विश्वास और सुरक्षा की भावना कायम रखी जाए। उन्होंने कहा कि हर पुलिसकर्मी को पीड़ितों के प्रति संवेदनशील रवैया अपनाना होगा।

  • डीआईजी ने महिला और बाल अपराधों में विशेष संवेदनशीलता के निर्देश दिए।
  • हत्या, लूट, डकैती और बलात्कार जैसे मामलों में त्वरित कार्रवाई पर जोर।
  • साइबर अपराध, जुआ, गौ-तस्करी और अवैध शराब के खिलाफ सघन अभियान।
  • सोशल मीडिया पर अफवाहों की रोकथाम और निगरानी प्रणाली को सुदृढ़ करने के निर्देश।

डीआईजी चन्नप्पा ने कहा कि पुलिस का उद्देश्य केवल अपराधियों की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि समाज में विश्वास और सुरक्षा की भावना स्थापित करना है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि पुलिस का व्यवहार पीड़ितों और आम नागरिकों के प्रति सहानुभूतिपूर्ण और संवेदनशील होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यही पुलिस की असली पहचान है।

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