अहम संदेश: भारत का संविधान समष्टि के भाव से जोड़ने की प्रेरणा देता है, ‘राष्ट्र प्रथम’ से मजबूत होंगे संकल्प—सीएम योगी 🇮🇳

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लखनऊ, अजय कुमार | वेब वार्ता

77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को अपने सरकारी आवास पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया और प्रदेशवासियों को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि भारत का संविधान समष्टि के भाव के साथ जोड़ने की प्रेरणा देता है और ‘एक भारत–श्रेष्ठ भारत’ के संकल्प को साकार करने में इसकी भूमिका ऐतिहासिक रही है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि संविधान के प्रति श्रद्धा और समर्पण ही नए भारत की आधारशिला है।

संविधान ने दिखाई 76 वर्षों की दिशा

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान लागू हुआ और बीते 76 वर्षों की यात्रा में इसने अनेक उतार-चढ़ाव देखे। इसके बावजूद संविधान ने उत्तर से दक्षिण और पूरब से पश्चिम तक भारत की एकता, अखंडता और नागरिक गौरव को मजबूती प्रदान की। उन्होंने कहा कि आज नए भारत का जो स्वरूप सामने है, उसमें संविधान की केंद्रीय भूमिका है।

राष्ट्रनायकों को किया नमनywAAAAAAQABAAACAUwAOw==

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद, संविधान शिल्पी डॉ. भीमराव आंबेडकर, लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल और नेताजी सुभाष चंद्र बोस सहित स्वतंत्रता संग्राम के सभी महान सपूतों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि इन राष्ट्रनायकों के बलिदान और विचारों से ही भारत का लोकतांत्रिक ढांचा मजबूत हुआ।

सम-विषम परिस्थितियों में संविधान बना संबल

मुख्यमंत्री ने कहा कि 15 अगस्त 1947 को देश आजाद हुआ और 26 नवंबर 1949 को संविधान को अंगीकार किया गया, जिसे आज संविधान दिवस के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि सम-विषम परिस्थितियों में संविधान ही देश का संबल बना है। संविधान की पंक्ति “हम भारत के लोग” प्रत्येक नागरिक के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

संविधान का असली संरक्षक नागरिक

सीएम योगी ने कहा कि भारत के संविधान का वास्तविक संरक्षक देश का नागरिक है। नागरिकों के प्रति हर संस्था, मंत्रालय और विभाग को अपनी जवाबदेही सुनिश्चित करनी होगी। यही संविधान के प्रति हमारे सच्चे समर्पण का परिचायक है। उन्होंने चेताया कि संविधान के मूल भाव का अनादर, स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान का भी अनादर है।

न्याय, समता और बंधुता—संविधान की आत्मा

मुख्यमंत्री ने कहा कि न्याय, समता और बंधुता संविधान के तीन ऐसे शब्द हैं, जिन्होंने भारत को दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र बनाने में अहम भूमिका निभाई है। बिना किसी भेदभाव के न्याय, जाति-धर्म-भाषा-क्षेत्र से ऊपर उठकर समता और बंधुता का भाव विकसित होगा, तभी विकसित भारत का सपना साकार होगा।

‘राष्ट्र प्रथम’ से मजबूत होंगे देश के संकल्प

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि ‘राष्ट्र प्रथम’ का भाव ही संविधान की आत्मा है। जो व्यक्ति खुद को संविधान, न्याय और व्यवस्था से ऊपर मानता है, वह संविधान की अवमानना करता है। आज का दिन संविधान के प्रति समर्पण के साथ देश के संकल्पों को आगे बढ़ाने की नई प्रेरणा देता है। यही भाव भारत को आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाएगा।

निष्कर्ष

77वें गणतंत्र दिवस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का संबोधन संविधान, नागरिक कर्तव्य और राष्ट्र प्रथम के भाव को केंद्र में रखता है। यह संदेश स्पष्ट करता है कि संविधान के मूल मूल्यों के साथ चलकर ही भारत विकसित, समृद्ध और आत्मनिर्भर राष्ट्र के रूप में आगे बढ़ सकता है।

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