लखनऊ, नेशनल डेस्क | वेब वार्ता
Chamar Village Name Controversy: उत्तर प्रदेश में गांवों के नाम को लेकर एक नया सामाजिक और राजनीतिक मुद्दा सामने आया है। यूपी अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम के पूर्व अध्यक्ष तथा विधान परिषद सदस्य डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल ने जालौन जिले के एक गांव का नाम “चमारी” होने पर आश्चर्य और आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि आजादी के 79 साल बाद भी किसी गांव का नाम जाति आधारित शब्द पर होना समाज में व्याप्त असमानता की मानसिकता को दर्शाता है।
डॉ. निर्मल ने यह भी कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि उन्नाव जिले में भी एक गांव का नाम “चमरौली” है। उन्होंने कहा कि वे जल्द ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर इन गांवों के नाम बदलने का आग्रह करेंगे।
- जालौन जिले के “चमारी” गांव के नाम पर डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल ने जताई आपत्ति
- उन्नाव जिले में “चमरौली” नामक गांव का भी किया उल्लेख
- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर नाम बदलने का करेंगे आग्रह
- डॉ. अम्बेडकर और महात्मा गांधी के विचारों को लेकर भी रखी राय
गांव के नाम को लेकर जताई चिंता
डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल ने कहा कि जालौन जिले में “चमारी” नामक गांव का होना आज के दौर में हैरानी की बात है। उनका मानना है कि स्वतंत्रता के इतने वर्षों बाद भी यदि किसी गांव का नाम जातिगत पहचान से जुड़ा हुआ है, तो यह समाज में मौजूद मानसिकता और सामाजिक संरचना पर सवाल खड़े करता है।
उन्होंने कहा कि इस गांव में प्रसिद्ध पत्रकार सौरभ द्विवेदी भी रहते हैं, जो देश के चर्चित डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म से जुड़े हुए हैं। इसके बावजूद इस नाम को लेकर कभी व्यापक चर्चा या पहल नहीं हुई, यह भी सोचने वाली बात है।
- जालौन जिले में एक गांव का नाम “चमारी” होने पर विवाद
- उन्नाव जिले में “चमरौली” नामक गांव का भी उल्लेख
- जाति आधारित नामों को बदलने की मांग
- मुख्यमंत्री से मिलकर नाम परिवर्तन का प्रस्ताव रखने की तैयारी
अम्बेडकर और गांधी को लेकर दिया बयान
डॉ. निर्मल ने अपने बयान में महात्मा गांधी और डॉ. भीमराव अम्बेडकर के संदर्भ में भी अपनी राय व्यक्त की। उन्होंने कहा कि गांधी और अम्बेडकर के विचारों में एक महत्वपूर्ण अंतर यह था कि गांधी ने दलितों का दर्द प्रत्यक्ष रूप से नहीं झेला, जबकि डॉ. अम्बेडकर ने स्वयं दलित समाज की पीड़ा को महसूस किया और उसे जिया।
उन्होंने कहा कि डॉ. अम्बेडकर ने समाज में समानता और सम्मान की लड़ाई लड़ी, जिसके परिणामस्वरूप आज संविधान के माध्यम से दलितों को अधिकार और न्याय की गारंटी मिली है।
नाम बदलने के लिए मुख्यमंत्री से करेंगे मुलाकात
डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल ने कहा कि वे इस मुद्दे को लेकर जल्द ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात करेंगे। उनका उद्देश्य इन गांवों के नाम बदलने के लिए सरकार से पहल कराने का है, ताकि समाज में समानता और सम्मान का संदेश दिया जा सके।
उन्होंने कहा कि यदि गांवों के नाम ऐसे शब्दों पर आधारित हैं जो किसी समुदाय की पहचान को अपमानजनक रूप में प्रस्तुत करते हैं, तो उन्हें बदलना समय की आवश्यकता है। इससे समाज में सकारात्मक संदेश जाएगा और सामाजिक समरसता को भी बढ़ावा मिलेगा।
- डॉ. निर्मल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात करेंगे
- गांवों के नाम बदलने के लिए औपचारिक प्रस्ताव रखा जाएगा
- सरकार स्तर पर मामले की समीक्षा हो सकती है
- स्थानीय प्रशासन और ग्राम पंचायत से भी राय ली जा सकती है
सामाजिक समरसता का मुद्दा बना मामला
विशेषज्ञों का मानना है कि गांवों और शहरों के नाम केवल भौगोलिक पहचान ही नहीं होते, बल्कि वे सामाजिक और सांस्कृतिक प्रतीक भी बन जाते हैं। ऐसे में यदि किसी स्थान का नाम किसी समुदाय की पहचान को लेकर विवाद या असहजता पैदा करता है, तो उस पर विचार करना आवश्यक हो जाता है।
उत्तर प्रदेश में समय-समय पर कई स्थानों के नाम बदले जाने के उदाहरण सामने आए हैं। ऐसे में अब जालौन के “चमारी” और उन्नाव के “चमरौली” गांव को लेकर उठी यह मांग भी राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय बनती दिखाई दे रही है।







