लखनऊ, अजय कुमार | वेब वार्ता
बुंदेलखंड क्षेत्र में वर्षों से चली आ रही पानी की किल्लत अब धीरे-धीरे इतिहास बनती जा रही है। जल जीवन मिशन के तहत लागू की गई ‘हर घर नल’ योजना ने इस सूखा प्रभावित क्षेत्र के लोगों के जीवन में नई उम्मीद जगा दी है। जहां पहले महिलाओं को सिर पर घड़ा रखकर दूर-दराज से पानी लाना पड़ता था, वहीं अब घरों में स्वच्छ जल की नियमित आपूर्ति हो रही है।
महिलाओं को मिली राहत, बदली दिनचर्या
बुंदेलखंड के कई जिलों में पानी की तलाश महिलाओं के लिए सबसे बड़ी चुनौती थी। कुओं और हैंडपंपों पर लंबी कतारें लगती थीं। अब घरों में नल लगने से महिलाओं को समय, श्रम और स्वास्थ्य तीनों में राहत मिली है। इससे बच्चों की देखभाल, शिक्षा और घरेलू कार्यों पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ा है।
प्रमुख जिलों में जलापूर्ति की स्थिति
| जिला | योजना/परियोजना | कवर्ड घर/परिवार | पाइपलाइन लंबाई |
|---|---|---|---|
| महोबा | जल जीवन मिशन | 1.12 लाख से अधिक | 1131 किमी |
| चित्रकूट | सिलौटा समूह योजना | 1.25 लाख से अधिक | 572 किमी |
| झांसी | जल जीवन मिशन | 11,437 कनेक्शन | — |
| बांदा | अमलीकौर व खटान परियोजना | 82,266 घर | — |
| हमीरपुर | पेयजल परियोजना | 320 गांव | — |
महोबा और चित्रकूट में बदली हालात
महोबा जिले में कभी वाटर ट्रेन से पानी पहुंचाने की नौबत आ गई थी। अब यहां पांच परियोजनाओं के माध्यम से एक लाख से अधिक घरों तक पाइपलाइन पहुंच चुकी है। वहीं चित्रकूट के पहाड़ी, रामनगर और मानिकपुर क्षेत्र में यमुना नदी से शुद्ध किया गया जल टैंकों के माध्यम से घरों तक भेजा जा रहा है।
बरहट की ग्राम प्रधान श्रीमती रज्जन देवी का कहना है कि स्वच्छ जल मिलने से बच्चों का स्वास्थ्य सुधरा है और स्कूल जाने की आदत भी बेहतर हुई है।
ग्रामीणों की बदली सोच और जीवनशैली
- महिलाओं को पानी भरने की परेशानी से मुक्ति
- स्वच्छता और स्वास्थ्य में सुधार
- बच्चों में नियमित पढ़ाई की प्रवृत्ति
- पशुपालन और खेती को मिला सहयोग
रैपुरा, चांदी बांगर और अन्य ग्राम समूह योजनाओं के तहत हजारों परिवारों को लाभ मिला है। ग्रामीण चुनबाद यादव बताते हैं कि अब जानवरों के लिए भी पानी की समस्या नहीं रही। झांसी के गैरहा गांव के बुजुर्ग कामता प्रसाद कहते हैं कि यह दिन देखने के लिए वर्षों इंतजार करना पड़ा।
बांदा और हमीरपुर में बढ़ी जल सुरक्षा
बांदा जिले में अमलीकौर और खटान परियोजना के तहत 544 गांवों में जलापूर्ति शुरू हो चुकी है। वहीं हमीरपुर में 322 में से 320 गांवों तक नल से पानी पहुंचाया जा रहा है। इससे क्षेत्र में सूखा और पलायन जैसी समस्याओं पर भी अंकुश लगने की उम्मीद है।
निष्कर्ष
बुंदेलखंड के लिए ‘हर घर नल’ योजना सिर्फ एक सरकारी परियोजना नहीं, बल्कि जीवन बदलने वाला अभियान बनकर उभरी है। स्वच्छ जल की उपलब्धता से स्वास्थ्य, शिक्षा, स्वच्छता और सामाजिक सुरक्षा को मजबूती मिली है। यह योजना क्षेत्र के सतत विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित हो रही है।
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