रामपुर हाउंड: उत्तर प्रदेश का गौरव, BSF में भारतीय नस्लों की बढ़ती भूमिका, नवाबों की विरासत से राष्ट्र सेवा तक

लखनऊ, अजय कुमार (वेब वार्ता)। उत्तर प्रदेश की ऐतिहासिक रामपुर हाउंड नस्ल, जो कभी नवाबों के शिकार अभियानों का गौरव थी, अब सीमा सुरक्षा बल (BSF) में राष्ट्र सेवा में अग्रणी भूमिका निभा रही है। यह नस्ल, जिसकी उत्पत्ति नवाब अहमद अली खान के समय दक्षिण भारत से लाई गई ताज़ी नस्ल और इंग्लिश ग्रेहाउंड के मिश्रण से हुई, अपनी गति, शक्ति, और निडरता के लिए प्रसिद्ध है।

उत्तर प्रदेश ने देश को वीरता और परंपराओं की अनगिनत कहानियां दी हैं, अब एक नई शान जुड़ी है—भारतीय नस्ल के कुत्तों की भूमिका से। सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने उत्तर प्रदेश की रामपुर हाउंड नस्ल को अपनी कार्यशक्ति में शामिल कर एक नई मिसाल कायम की है। यह पहल PM नरेंद्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान की सशक्त झलक है, जो भारतीय नस्लों के पुनर्जागरण को नई दिशा दे रही है।

भारतीय नस्लों की ऐतिहासिक विरासत

भारतीय इतिहास, संस्कृति और पौराणिक कथाओं में कुत्तों का विशेष सम्मान है। देशी नस्लें बहादुरी, निष्ठा और शक्ति के लिए जानी जाती हैं। रामपुर हाउंड नवाबों के दरबारों और शिकार अभियानों का गौरव रही है, जबकि मुधोल हाउंड (कर्नाटक) सुरक्षा और शिकार से जुड़ी है।

PM मोदी की प्रेरणा: 2018 से नई शुरुआत

जनवरी 2018 में PM मोदी ने BSF के राष्ट्रीय कुत्ता प्रशिक्षण केंद्र (NTCD), टेकनपुर का दौरा किया और भारतीय नस्लों को बढ़ावा देने पर जोर दिया। 30 अगस्त 2020 के ‘मन की बात’ में उन्होंने देशवासियों से भारतीय नस्लों को अपनाने का आह्वान किया, जो आत्मनिर्भरता की भावना से प्रेरित था।

इसके फलस्वरूप, BSF ने रामपुर हाउंड (UP) और मुधोल हाउंड (कर्नाटक) को शामिल किया। ये नस्लें फुर्ती, सहनशक्ति, अनुकूलन क्षमता और दृढ़ता के लिए प्रसिद्ध हैं। भारत की विविध जलवायु में इनका प्राकृतिक रोग प्रतिरोधक गुण और कम रखरखाव इन्हें आदर्श बनाते हैं।

रामपुर हाउंड: नवाबों की विरासत से राष्ट्र सेवा तक

उत्तर प्रदेश के रामपुर रियासत से उत्पन्न रामपुर हाउंड नवाबों द्वारा शिकार के लिए पाली जाती थी। अपनी गति, सहनशक्ति और निडरता के लिए जानी जाने वाली यह नस्ल अब सीमाओं पर तैनात है।

रामपुर रियासत गजेटियर (1911) के अनुसार, रामपुर हाउंड की मूल नस्ल ताज़ी दक्षिण भारत से लाई गई थी। यह ग्रे रंग की, कम बालों वाली, उग्र और लगभग अपालनीय नस्ल थी। बाद में ताज़ी और इंग्लिश ग्रेहाउंड के मिश्रण से एक बेहतर नस्ल बनी, जो ताज़ी की शक्ति और ग्रेहाउंड की गति का मिश्रण है। रामपुर के नवाबों द्वारा शिकार के लिए पाली गई यह नस्ल अब BSF की सुरक्षा इकाइयों में तैनात है।

बीएसएफ की पहल: 150+ भारतीय नस्ल के कुत्ते तैनात

BSF ने NTCD टेकनपुर में इन नस्लों को प्रशिक्षित किया, और अब 150 से अधिक बीएसएफ इकाइयों में तैनात हैं—पश्चिमी/पूर्वी सीमाओं से नक्सल क्षेत्रों तक। इनकी उत्कृष्टता ने विदेशी नस्लों को पछाड़ दिया है।

ऐतिहासिक उपलब्धि: ‘रिया’ का डबल खिताब

ऑल इंडिया पुलिस ड्यूटी मीट 2024 में लखनऊ में रिया (मुधोल हाउंड) ने 116 विदेशी नस्लों को हराकर ‘बेस्ट इन ट्रैकर ट्रेड’ और ‘बेस्ट डॉग ऑफ द मीट’ खिताब जीता।

एकता दिवस परेड 2025: भारतीय नस्लों का मार्च

आगामी एकता दिवस परेड में गुजरात के एकता नगर में केवल भारतीय नस्ल के BSF कुत्तों की विशेष टुकड़ी मार्च करेगी। बीएसएफ बी डॉग ट्रेनिंग डेमो भी देगा, जो आत्मनिर्भर BSF की शक्ति दिखाएगा।

यह पहल भारतीय नस्लों की क्षमता और गौरव का प्रमाण है।

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