हरदोई, लक्ष्मीकांत पाठक | वेब वार्ता
उत्तर प्रदेश के हरदोई जनपद की पत्रकारिता, विधिक और सामाजिक दुनिया को उस समय गहरा आघात लगा, जब अमर उजाला के पूर्व ब्यूरो चीफ, वरिष्ठ अधिवक्ता एवं प्रख्यात समाजसेवी अरुणेश वाजपेयी का 26 जनवरी 2026 को लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। गणतंत्र दिवस के दिन उनका जाना न केवल एक वरिष्ठ पत्रकार का अवसान है, बल्कि हरदोई की वैचारिक और सामाजिक चेतना को दिशा देने वाले युग का अंत भी माना जा रहा है।
अरुणेश वाजपेयी अपने पीछे निष्पक्ष पत्रकारिता, न्यायप्रिय अधिवक्ता और निस्वार्थ समाजसेवा की ऐसी विरासत छोड़ गए हैं, जिसकी भरपाई निकट भविष्य में असंभव प्रतीत होती है। उनके निधन की खबर फैलते ही जनपद में शोक की लहर दौड़ गई।
निर्भीक पत्रकारिता का सशक्त स्तंभ
अमर उजाला में ब्यूरो चीफ के रूप में कार्य करते हुए अरुणेश वाजपेयी ने पत्रकारिता के उच्चतम मानकों को स्थापित किया। उनकी रिपोर्टिंग का केंद्र हमेशा जनहित, सामाजिक न्याय और प्रशासनिक जवाबदेही रहा। भ्रष्टाचार, शिक्षा व्यवस्था की खामियां, स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली और ग्रामीण समस्याएं उनकी लेखनी के प्रमुख विषय रहे।
सहकर्मियों के अनुसार, वाजपेयी जी की कलम कभी सत्ता के दबाव में नहीं झुकी। वे निर्भीकता के साथ सच लिखते थे और आमजन की आवाज को मजबूती से सामने रखते थे। विशेष रूप से हरदोई के ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी पर की गई उनकी रिपोर्ट श्रृंखला ने प्रशासन को ठोस कदम उठाने के लिए मजबूर किया।
विधिक सेवा में मानवीय दृष्टिकोण
वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में अरुणेश वाजपेयी ने न्यायालयों में कमजोर, वंचित और पीड़ित वर्ग के लिए निस्वार्थ सेवा की। उन्होंने अनेक मामलों में निःशुल्क कानूनी सहायता प्रदान की, विशेषकर दलित, अल्पसंख्यक और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को।
उनकी पैरवी केवल कानूनी नहीं होती थी, बल्कि उसमें संवेदनशीलता और मानवीय सरोकार स्पष्ट दिखाई देता था। दर्जनों मामलों में पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने में उनकी भूमिका निर्णायक रही।
समाजसेवा और शिक्षा में योगदान
समाजसेवा के क्षेत्र में भी अरुणेश वाजपेयी का योगदान उल्लेखनीय रहा। वे रफी अहमद इंटर कॉलेज के प्रबंधक के रूप में शिक्षा के प्रसार में सक्रिय थे। इसके अतिरिक्त वे वरदान चैरिटेबल ट्रस्ट के ट्रस्टी के रूप में गरीब और जरूरतमंद परिवारों की सहायता में निरंतर जुटे रहे।
उनके प्रयासों से सैकड़ों निर्धन कन्याओं के विवाह संपन्न कराए गए तथा समय-समय पर स्वास्थ्य शिविरों और सामाजिक जागरूकता अभियानों का आयोजन हुआ। समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक सहायता पहुंचाना उनका मूल उद्देश्य था।
| क्षेत्र | भूमिका | प्रभाव |
|---|---|---|
| पत्रकारिता | अमर उजाला पूर्व ब्यूरो चीफ | जनहित मुद्दों का प्रभावी उठान, प्रशासनिक जवाबदेही |
| विधिक सेवा | वरिष्ठ अधिवक्ता | कमजोर वर्गों को न्याय, निःशुल्क कानूनी सहायता |
| समाजसेवा | वरदान चैरिटेबल ट्रस्ट ट्रस्टी | निर्धन कन्याओं के विवाह, स्वास्थ्य व शिक्षा सेवा |
श्रद्धांजलि और विरासत
उनके निधन पर पत्रकार, अधिवक्ता, शिक्षाविद, समाजसेवी और जनप्रतिनिधियों ने गहरा शोक व्यक्त किया। अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति इस बात का प्रमाण थी कि अरुणेश वाजपेयी केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक संस्था के समान थे।
चर्चा है कि भविष्य में उनकी स्मृति में पत्रकारिता एवं समाजसेवा से जुड़ा पुरस्कार स्थापित किया जाएगा, ताकि युवा पीढ़ी उनके आदर्शों से प्रेरणा ले सके।
निष्कर्ष
अरुणेश वाजपेयी का निधन हरदोई ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की निष्पक्ष पत्रकारिता और सामाजिक चेतना के लिए अपूरणीय क्षति है। उनका जीवन सत्य, न्याय और सेवा का प्रतीक था। वे भले ही हमारे बीच न हों, लेकिन उनके विचार और कार्य आने वाली पीढ़ियों को सदैव मार्गदर्शन देते रहेंगे।
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