Acharya Devvrat Farmers Dialogue: सोनीपत में किसानों से संवाद, देशी नस्ल की गायों के संरक्षण पर जोर

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सोनीपत, राजेश आहूजा | वेब वार्ता

Acharya Devvrat Farmers Dialogue: गुजरात और महाराष्ट्र के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने सोनीपत के राई रेस्ट हाउस में किसानों और पशुपालकों के साथ विशेष संवाद कार्यक्रम में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने देशी नस्ल की गायों के संरक्षण, संवर्धन और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया। राज्यपाल ने कहा कि देशी गायों के गोबर और गौमूत्र से तैयार होने वाले प्राकृतिक उत्पाद खेती की मिट्टी को पुनर्जीवित करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं और किसानों की आय बढ़ाने में भी सहायक साबित हो सकते हैं।

⚡ संक्षिप्त वार्ता (News Summary)

  • राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने सोनीपत में किसानों से संवाद किया
  • देशी नस्ल की गायों के संरक्षण और संवर्धन पर दिया जोर
  • प्राकृतिक खेती को अपनाने की किसानों से अपील
  • जीवामृत और घन जीवामृत के उपयोग से मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने की सलाह

देशी नस्ल की गायों के संरक्षण पर दिया जोर

संवाद कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने किसानों और पशुपालकों से देशी नस्ल की गायों के संरक्षण और संवर्धन के महत्व पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि हरियाणा नस्ल, गिर, साहीवाल, राठी और थारपारकर जैसी देशी नस्लों में दूध उत्पादन और गुणवत्ता की अपार संभावनाएं हैं।

उन्होंने किसानों को इन नस्लों के संरक्षण और सुधार के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि यदि इन पर वैज्ञानिक तरीके से काम किया जाए तो दूध उत्पादन के साथ-साथ पशुपालन की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।

📌 क्या है पूरा मामला?

  • सोनीपत में राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने किसानों से संवाद किया
  • देशी नस्ल की गायों के संवर्धन और प्राकृतिक खेती पर जोर
  • देशी गायों के गोबर और गौमूत्र से बनने वाले उत्पादों के लाभ बताए
  • किसानों ने अपने अनुभव साझा किए

प्राकृतिक खेती को बताया जरूरी

राज्यपाल ने कहा कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग ने भूमि की उर्वरता को नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने बताया कि देशी गाय के गोबर और गौमूत्र से बनने वाले ‘जीवामृत’ और ‘घन जीवामृत’ जैसे जैविक उत्पाद मिट्टी की सेहत को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि वे प्राकृतिक खेती को अपनाकर कृषि लागत को कम करें और मिट्टी की उर्वरता को पुनः स्थापित करें। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ स्वस्थ और सुरक्षित खाद्य उत्पादन भी संभव होगा।

किसानों ने साझा किए अपने अनुभव

कार्यक्रम में हरियाणा के विभिन्न जिलों से आए किसानों और पशुपालकों ने अपने अनुभव भी साझा किए। झज्जर जिले के गांव फरमान की पशुपालक रेनू सांगवान ने बताया कि वह लंबे समय से देशी नस्ल की गायों के संवर्धन पर कार्य कर रही हैं और उनके पास 24 लीटर तक दूध देने वाली देशी गाय है। वर्तमान में उनके पास लगभग 280 देशी गोवंश हैं।

इसी प्रकार सोनीपत के गांव भैंसवाल के किसान ने बताया कि उनकी शुद्ध हरियाणा नस्ल की गाय 26 लीटर तक दूध दे रही है। वहीं रोहतक जिले के गांव निदाना से आए पशुपालक सारण देव ने बताया कि उनके पास भी 17 लीटर से अधिक दूध देने वाली कई हरियाणा नस्ल की गायें हैं।

प्राकृतिक खेती से बढ़ेगी किसानों की आय

राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि देशी गायों के गोबर और गौमूत्र से तैयार की जाने वाली प्राकृतिक खाद और जैविक कीटनाशक रासायनिक उर्वरकों की तुलना में अधिक लाभकारी हैं। इनके उपयोग से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और उत्पादन क्षमता में सुधार होता है।

उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि वे देशी नस्लों के संरक्षण के साथ प्राकृतिक खेती को अपनाएं। इससे खेती अधिक टिकाऊ बनेगी, लागत कम होगी और किसानों की आय में भी वृद्धि होगी। कार्यक्रम के अंत में किसानों और पशुपालकों ने राज्यपाल के विचारों की सराहना करते हुए देशी नस्ल सुधार और प्राकृतिक खेती को अपनाने की प्रतिबद्धता जताई।

महत्वपूर्ण: राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने किसानों से देशी नस्ल की गायों के संरक्षण और प्राकृतिक खेती अपनाने का आह्वान किया।


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