हरदोई/लखनऊ, लक्ष्मीकान्त पाठक | वेब वार्ता
“संघर्ष जब संकल्प बन जाए, तो असंभव भी संभव हो जाता है”—यह कथन हरदोई जिले के कछौना क्षेत्र के अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोही अभिनीत कुमार मौर्य ने अपने जीवन और कर्म से साकार कर दिखाया है। सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों में पले-बढ़े अभिनीत ने वह ऊँचाई हासिल की, जो न केवल शारीरिक क्षमता, बल्कि अदम्य इच्छाशक्ति और अनुकरणीय साहस का जीता-जागता प्रमाण है।
उनकी इसी विशिष्ट उपलब्धि, राष्ट्रप्रेम और युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनने वाले योगदान को सम्मान देते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने उन्हें वर्ष 2026 का प्रतिष्ठित ‘स्वामी विवेकानंद यूथ अवॉर्ड’ प्रदान किया। यह सर्वोच्च युवा सम्मान राष्ट्रीय युवा दिवस (12 जनवरी) के अवसर पर लखनऊ में आयोजित गरिमामय समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों अभिनीत को अलंकृत किया गया।
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मुख्यमंत्री का सम्मान: प्रदेश में प्रथम स्थान पर खड़ा हुआ नाम
यह उपलब्धि और भी खास इसलिए है क्योंकि अभिनीत कुमार मौर्य ने स्वामी विवेकानंद यूथ अवॉर्ड की चयन प्रक्रिया में पूरे उत्तर प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त किया। प्रदेशभर के उत्कृष्ट युवाओं में शीर्ष रैंक हासिल करना उनकी प्रतिभा, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक योगदान की सशक्त पुष्टि करता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अभिनीत को सम्मानित करते हुए कहा कि उनकी सफलता हरदोई जिले और पूरे प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने अभिनीत को युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बताते हुए कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद दृढ़ संकल्प से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
साधारण किसान परिवार से वैश्विक पहचान तक का सफर
अभिनीत कुमार मौर्य का जन्म हरदोई के कछौना क्षेत्र के एक साधारण किसान परिवार में हुआ। आर्थिक अभावों, संसाधनों की कमी और जोखिम भरे अभियानों के बावजूद उन्होंने कभी अपने सपनों को कमजोर नहीं पड़ने दिया। निरंतर अभ्यास, अनुशासन और आत्मविश्वास के बल पर उन्होंने न केवल भारत की ऊँची चोटियों पर कदम रखे, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बनाई।
अफ्रीका महाद्वीप की दूसरी सबसे ऊँची चोटी माउंट केन्या पर तिरंगा फहराकर उन्होंने न केवल हरदोई जनपद, बल्कि पूरे देश को अंतरराष्ट्रीय मंच पर गौरव का अनुभव कराया। यह उपलब्धि भारत के पहले ऐसे पर्वतारोही के रूप में दर्ज हुई है, जिन्होंने इस चोटी पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया।
पर्यावरण और समाज के प्रति समर्पण
पर्वतारोहण के साथ-साथ अभिनीत कुमार मौर्य पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण तथा युवाओं में साहसिक खेलों के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए निरंतर सक्रिय हैं। उनका स्पष्ट मानना है कि प्रकृति के संरक्षण के बिना किसी भी शिखर की विजय अधूरी और अर्थहीन है। उनकी यह प्रतिबद्धता उन्हें एक जिम्मेदार नागरिक और युवा नेता के रूप में भी स्थापित करती है।
स्वामी विवेकानंद यूथ अवॉर्ड: केवल 10 युवाओं को मिलने वाला सर्वोच्च सम्मान
उत्तर प्रदेश सरकार हर वर्ष प्रदेश भर से ऐसे केवल 10 विशिष्ट युवाओं का चयन करती है, जिन्होंने खेल, समाज सेवा, पर्यावरण या किसी अन्य क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया हो। इस पुरस्कार में शामिल हैं:
- ₹50,000 की प्रोत्साहन राशि
- स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा
- प्रशस्ति पत्र एवं अंगवस्त्र
- सम्मानस्वरूप एक सड़क का नामकरण
अभिनीत को यह सम्मान मिलना न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि ग्रामीण युवाओं के लिए एक बड़ा प्रोत्साहन भी है।
हरदोई में हर्ष और गर्व का माहौल
अभिनीत को मिले इस सर्वोच्च युवा सम्मान से हरदोई जनपद, विशेषकर कछौना क्षेत्र में उल्लास और गर्व का वातावरण व्याप्त है। जनप्रतिनिधियों, बुद्धिजीवियों और युवाओं ने इसे जिले के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि अभिनीत की सफलता ने यह सिद्ध कर दिया है कि ग्रामीण अंचल से निकलकर भी वैश्विक पहचान बनाई जा सकती है।
युवाओं के लिए प्रेरणा का जीवंत प्रतीक
खेतों की मेड़ों से निकलकर अंतरराष्ट्रीय पर्वत शिखरों तक की अभिनीत कुमार मौर्य की यात्रा आज युवाओं के लिए सपने, संघर्ष और सफलता की जीवंत मिसाल बन चुकी है। उनकी कहानी यही संदेश देती है— “जब लक्ष्य स्पष्ट हो और संकल्प अडिग, तब कठिनतम राह भी मंज़िल की ओर झुक जाती है।”
यह सम्मान न केवल अभिनीत की मेहनत का पुरस्कार है, बल्कि हर उस युवा के लिए प्रेरणा है जो सपनों को सच करने की राह पर चल रहा है। हरदोई से निकला यह युवा अब पूरे प्रदेश और देश के लिए गौरव का प्रतीक बन चुका है।




