हरदोई, लक्ष्मीकान्त पाठक | वेब वार्ता
ऐतिहासिक 84 कोसी परिक्रमा का तीसरा पड़ाव शुक्रवार को कोरौना (सीतापुर) से होते हुए कोथावां पहुंच गया। अमावस्या के दिन ब्रह्म मुहूर्त में डंका, घंटा, घड़ियाल और शंखनाद के साथ वैदिक मंत्रोच्चार के बीच परिक्रमा आगे बढ़ी। देश-विदेश से आए साधु-संतों और श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव के साथ इस धर्मयात्रा में सहभागिता की।
पड़ाव स्थल पर सांसद अशोक रावत एवं उपजिलाधिकारी सण्डीला नारायणी भाटिया ने साधु-संतों और श्रद्धालुओं को माला पहनाकर भव्य स्वागत किया। एसडीएम द्वारा भंडारे का आयोजन भी कराया गया, जिससे कोई श्रद्धालु भूखा न रहे।
भक्ति और आस्था का उमड़ा सैलाब
परिक्रमा पड़ाव पर जहां तक नजर जाती, वहां आस्था का सैलाब उमड़ता दिखाई दिया। श्रद्धालु बागों, सड़कों के किनारे बने रैन बसेरों, खुले मैदानों और टेंटों में ठहरकर भक्ति आराधना में लीन नजर आए।
ढोल-मंजीरे की ध्वनि, भजनों की गूंज और “सीताराम” के जयघोष से कोथावां का वातावरण भक्तिमय बना रहा। बच्चे, युवा, बुजुर्ग, महिलाएं और दिव्यांग सभी बड़े उत्साह के साथ परिक्रमा में शामिल हुए।
प्रशासनिक व्यवस्थाएं रहीं सक्रिय
मेले में स्वास्थ्य विभाग का कैंप, राजस्व विभाग की टीम और नगर पंचायत की टीम पूरी तरह से मुस्तैद रही। कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार मीणा ने मेले का भ्रमण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
प्रशासन द्वारा सुरक्षा, यातायात और स्वास्थ्य सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया गया, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
व्यवस्थाओं में सामने आईं कुछ समस्याएं
प्राथमिक विद्यालय बिराहिमपुर में बने सामुदायिक शौचालय में ताला लगे होने के कारण श्रद्धालुओं को बाहर शौच के लिए जाना पड़ा।
वहीं कोथावां में स्थित देशी शराब ठेका खुले रहने से अराजकतत्वों का जमावड़ा बना रहा, जिससे श्रद्धालुओं को परेशानी हुई। इस मामले में प्रशासन की निष्क्रियता पर स्थानीय लोगों ने नाराजगी जताई।
महंत संतोष दास खाकी ने बताया परिक्रमा का महत्व
मेले के सचिव महंत संतोष दास खाकी ने बताया कि 84 कोसी परिक्रमा विभिन्न संस्कृतियों के मिलन का प्रतीक है। यह परिक्रमा सांसारिक मोह-माया त्यागकर संयम और साधना का संदेश देती है।
उन्होंने कहा कि यह यात्रा फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से सिद्धिविनायक पूजन के साथ प्रारंभ होती है। इसे करने से संपूर्ण तीर्थों का फल प्राप्त होता है और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।
मुख्य बिंदुओं का सार
| विषय | विवरण |
|---|---|
| परिक्रमा | 84 कोसी परिक्रमा |
| तीसरा पड़ाव | कोथावां, हरदोई |
| स्वागतकर्ता | अशोक रावत, नारायणी भाटिया |
| व्यवस्थाएं | स्वास्थ्य, राजस्व, नगर पंचायत |
| सुरक्षा निरीक्षण | एसपी अशोक कुमार मीणा |
निष्कर्ष
84 कोसी परिक्रमा का तीसरा पड़ाव कोथावां में भक्ति, अनुशासन और सांस्कृतिक समरसता का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत करता दिखा। श्रद्धालुओं की भारी सहभागिता से यह आयोजन क्षेत्र के धार्मिक और सामाजिक जीवन में नई ऊर्जा का संचार कर रहा है।
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