Monday, February 23, 2026
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भजन-कीर्तन से गुंजायमान हुआ 84 कोसी परिक्रमा का चौथा पड़ाव गिरधरपुर उमरारी

हरदोई, लक्ष्मीकान्त पाठक | वेब वार्ता

नैमिषारण्य से प्रारंभ हुई 84 कोसी परिक्रमा शनिवार को अपने चौथे पड़ाव गिरधरपुर उमरारी पहुंच गई। यहां देश-विदेश से आए लाखों श्रद्धालुओं ने डेरा डालकर भजन-कीर्तन, प्रवचन और रामनाम संकीर्तन शुरू किया। हरदोई जिले के इस पड़ाव पर पूरे क्षेत्र में धार्मिक वातावरण बन गया। स्थानीय नागरिकों ने श्रद्धालुओं की सेवा में बढ़-चढ़कर भाग लिया। रविवार को परिक्रमा यहां से पांचवें पड़ाव साकिन गोपालपुर के लिए रवाना होगी और सोमवार को सीतापुर जिले में प्रवेश करेगी।

तीसरे से चौथे पड़ाव तक भक्तिमय यात्रा

इससे पूर्व शुक्रवार की भोर में परिक्रमार्थियों ने नगवा कोथावां स्थित हत्याहरण तीर्थ में स्नान कर पूजा-पाठ किया। इसके बाद श्रद्धालु लगभग 12 किलोमीटर की यात्रा तय कर गिरधरपुर उमरारी पहुंचे। इस दौरान ढोल-मंजीरे, जयघोष और भजन से पूरा मार्ग भक्तिमय हो गया।

  • रामनाम के जयकारों से गूंजता वातावरण
  • ग्रामीणों द्वारा चाय-नाश्ता व भोजन सेवा
  • हाथी-घोड़े व पालकी देख बच्चों में उत्साह
  • जगह-जगह श्रद्धालुओं का स्वागत

रीति-रिवाज और परंपराओं का जीवंत संगम

रामादल के नाम से प्रसिद्ध यह सनातन धर्मयात्रा केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि सांस्कृतिक संगम का प्रतीक भी है। इसमें देश के विभिन्न प्रांतों के श्रद्धालु अपनी भाषा, वेशभूषा और परंपराओं के साथ शामिल होते हैं। नेपाल और भूटान से आए श्रद्धालु भी अपनी संस्कृति की झलक परिक्रमा पथ पर छोड़ते हैं।

जर्जर सड़कों से बढ़ी श्रद्धालुओं की परेशानी

परिक्रमा मार्ग की खराब स्थिति इस बार प्रमुख समस्या बनकर सामने आई। बरौली से गोवर्धनपुर, वाजिदपुर गोड़ा और मढ़ियां पुलिया के बीच सड़क निर्माण अधूरा होने से श्रद्धालुओं को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। व्यास पीठाधीश्वर अनिल शास्त्री द्वारा पूर्व में कई बार मार्ग सुधार की मांग की जा चुकी है।

समस्याक्षेत्रप्रभाव
जर्जर सड़कबरौली–गोवर्धनपुर मार्गयात्रा में देरी
निर्माण अधूरामढ़ियां पुलिया क्षेत्रआवागमन में बाधा
अतिक्रमणग्रामीण मार्गभीड़भाड़

गिरधरपुर उमरारी नामकरण का इतिहास

तीसरे और चौथे पड़ाव के बीच अटवा, मुठिया, गिरधरपुर और उमरारी गांव पड़ते हैं। रैन बसेरा गिरधरपुर में और दुर्गा मंदिर व सूर्यकुंड उमरारी में स्थित है। दोनों गांवों के बीच लगभग एक किलोमीटर की दूरी होने के कारण यह पड़ाव गिरधरपुर उमरारी के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

प्रमुख दर्शनीय और धार्मिक स्थल

नगवा कोथावां और गिरधरपुर उमरारी के बीच तीर्थ स्थल और सूर्यनारायण मंदिर स्थित हैं। यह क्षेत्र प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण है और पूरे वर्ष श्रद्धालुओं का आवागमन बना रहता है।

  • सूर्यनारायण मंदिर
  • हत्याहरण तीर्थ
  • सूर्यकुंड
  • दुर्गा मंदिर

प्रशासनिक मौजूदगी और व्यवस्था

इस अवसर पर एसडीएम न्यायिक संजय अग्रहरि, नायब तहसीलदार अनुपमा वर्मा, प्रभारी निरीक्षक बेनीगंज, ईओ दिव्यांशी दीक्षित सहित प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा।

निष्कर्ष

84 कोसी परिक्रमा का चौथा पड़ाव गिरधरपुर उमरारी श्रद्धा, सेवा और संस्कृति का संगम बन गया है। भजन-कीर्तन और संतों के प्रवचनों से क्षेत्र में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हुआ है। यदि मार्ग और व्यवस्थाओं में सुधार किया जाए, तो यह यात्रा और भी सुव्यवस्थित एवं प्रभावशाली बन सकती है।

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