Sunday, March 1, 2026
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अम्बेडकर नगर में 56 लड़कियों के अपहरण से हड़कंप, आराधना मिश्रा ने की एसआईटी जांच की मांग

लखनऊ, अजय कुमार (वेब वार्ता)। उत्तर प्रदेश के अम्बेडकर नगर जिले में एक माह में 56 लड़कियों के अपहरण के मामलों ने पूरे प्रदेश में सनसनी मचा दी है। जिले के 18 थानों में दर्ज इन घटनाओं ने कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और विधायक दल की नेता आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर इस मामले की उच्च स्तरीय जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) के गठन की मांग की है।

अपहरण के मामले और सामाजिक चिंता

दैनिक जागरण में प्रकाशित समाचार के अनुसार, अगस्त 2025 में अम्बेडकर नगर के विभिन्न थानों में 56 लड़कियों के अपहरण की एफआईआर दर्ज की गई। इनमें अकबरपुर कोतवाली (11 मामले), मालीपुर (9 मामले), जलालपुर (8 मामले), अहिरौली (7 मामले), बसखारी (6 मामले), जैतपुर (5 मामले) और अन्य थानों में 10 से अधिक मामले शामिल हैं। इनमें से अधिकांश पीड़िताएँ अनुसूचित जाति और आर्थिक रूप से कमजोर तबके से हैं, जिनमें 40 नाबालिग हैं।

लगभग डेढ़ दर्जन मामलों में पीड़ित परिवारों ने सामाजिक लज्जा के कारण पुलिस में शिकायत दर्ज नहीं की, और कुछ मामलों में पुलिस द्वारा प्राथमिकी दर्ज करने में कथित तौर पर उदासीनता बरती गई। इन घटनाओं ने न केवल स्थानीय समुदाय में भय और चिंता का माहौल पैदा किया है, बल्कि पूरे प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर सवाल उठाए हैं।

आराधना मिश्रा की मांग: एसआईटी जांच और कठोर कार्रवाई

कांग्रेस विधायक दल की नेता आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने इन घटनाओं को अत्यंत गंभीर बताते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखा है। उन्होंने कहा:

“56 लड़कियों के अपहरण की घटनाएँ बेहद चिंताजनक हैं। यह कानून-व्यवस्था की विफलता को दर्शाता है। पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने और अपराधियों पर कठोर कार्रवाई के लिए तत्काल एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया जाए।”

उन्होंने यह भी जोड़ा कि इन मामलों में पारदर्शी और त्वरित जांच आवश्यक है ताकि दोषियों को सजा मिले और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

पुलिस की कार्रवाई और विवाद

पुलिस के अनुसार, 56 में से 49 लड़कियों को बरामद कर लिया गया है, और इनमें से 40 नाबालिग हैं। अधिकांश मामलों को पुलिस ने प्रेम प्रसंग से जोड़ा है, लेकिन कुछ मामलों में लव जिहाद और जबरन धर्म परिवर्तन के आरोप भी सामने आए हैं। विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने इन घटनाओं को लव जिहाद का मामला करार देते हुए संगठित साजिश का आरोप लगाया है।

वीएचपी के अवध प्रांत प्रमुख अरविंद पांडे ने कहा:

“जिले में लव जिहाद तेजी से फैल रहा है। कई मामलों में मुस्लिम युवकों द्वारा हिंदू लड़कियों को प्रलोभन देकर अपहरण और धर्म परिवर्तन का प्रयास किया गया है। पुलिस की निष्क्रियता चिंताजनक है।”

हालांकि, पुलिस ने संगठित गिरोह की मौजूदगी से इनकार किया है और दावा किया है कि सभी मामले व्यक्तिगत प्रकृति के हैं। फिर भी, कुछ मामलों में कार्रवाई न होने की शिकायतें सामने आई हैं, जिसने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।

विपक्ष का हंगामा और सरकार पर दबाव

विपक्षी दलों, खासकर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी, ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद ने भी इस मामले में पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और शिकायत दर्ज करने से इनकार करने वालों को बर्खास्त करने की मांग की है। विपक्ष का कहना है कि यह घटनाएँ उत्तर प्रदेश में महिला सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की विफलता का प्रतीक हैं।

निष्कर्ष

अम्बेडकर नगर में 56 लड़कियों के अपहरण के मामले ने न केवल स्थानीय समुदाय को डरा दिया है, बल्कि पूरे प्रदेश में महिला सुरक्षा को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। आराधना मिश्रा की एसआईटी जांच की मांग और विपक्ष के बढ़ते दबाव से सरकार पर कार्रवाई का दबाव बढ़ गया है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस मामले में कितनी जल्दी और पारदर्शी ढंग से जांच पूरी होती है और पीड़ित परिवारों को न्याय मिलता है।

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