हरदोई, लक्ष्मीकान्त पाठक | वेब वार्ता
हरदोई जिले में 102 एंबुलेंस सेवा के कर्मियों ने एक बार फिर मानवता और तत्परता की मिसाल पेश की है। रविवार देर शाम प्रसव पीड़ा से जूझ रही एक गर्भवती महिला की एंबुलेंस में ही सुरक्षित डिलीवरी कराकर उन्होंने मां और नवजात की जान बचाई। कर्मियों की सूझबूझ, साहस और त्वरित कार्रवाई से एक बड़ी अनहोनी टल गई और एक नया जीवन सुरक्षित रूप से धरती पर आया।
घटना का पूरा विवरण
सुरसा थाना क्षेत्र के पौथेपुरवा गांव निवासी नसीम की पत्नी मुस्कान को रविवार शाम करीब 6:30 बजे अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हुई। परिजनों ने तुरंत 102 एंबुलेंस सेवा को सूचित किया। एंबुलेंस संख्या UP-32-FG-0942 को तत्काल मौके के लिए रवाना किया गया। पायलट अरुण कुमार और ईएमटी रामजीवन ने महज 20 मिनट में 14 किलोमीटर की दूरी तय कर शाम 6:55 बजे गांव पहुंचकर महिला को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सुरसा के लिए रवाना किया।
लेकिन रास्ते में बघौली–सुरसा मार्ग पर गंगापुर मोड़ के पास शाम लगभग 7:05 बजे महिला का दर्द असहनीय हो गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एंबुलेंस को वहीं रोकना पड़ा। पायलट अरुण कुमार और ईएमटी रामजीवन ने बुजुर्ग महिला अनवरी पत्नी अनवर (उम्र लगभग 55 वर्ष) के सहयोग से एंबुलेंस में ही इमरजेंसी डिलीवरी कराई। मुस्कान ने एक स्वस्थ शिशु को जन्म दिया।
डिलीवरी के तुरंत बाद मां और नवजात को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सुरसा में भर्ती कराया गया। वहां स्टाफ नर्स जुली की देखरेख में दोनों का उचित उपचार किया गया। चिकित्सकों ने बताया कि जच्चा और बच्चा दोनों पूरी तरह सुरक्षित और स्वस्थ हैं।
परिजनों और ग्रामीणों में आभार और सराहना
परिजनों ने एंबुलेंस टीम और स्वास्थ्यकर्मियों के प्रति गहरा आभार जताया। उन्होंने कहा कि कर्मियों की तत्परता और मानवीय संवेदनशीलता से एक नया जीवन सुरक्षित रूप से जन्मा, जो सराहनीय और प्रेरणादायक है। ग्रामीणों ने भी 102 सेवा की इस त्वरित कार्रवाई की जमकर तारीफ की और कहा कि यह घटना स्वास्थ्य सेवाओं में तत्परता का जीता-जागता उदाहरण है।
102 सेवा की सराहनीय भूमिका
102 एंबुलेंस सेवा ग्रामीण क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं और आपातकालीन प्रसव के लिए वरदान साबित हो रही है। यह सेवा न केवल समय पर अस्पताल पहुंचाने में मदद करती है, बल्कि जरूरत पड़ने पर रास्ते में ही इमरजेंसी डिलीवरी जैसी जटिल परिस्थितियों को भी संभालने में सक्षम है। कर्मियों की प्रशिक्षण और तत्परता ही इस सफलता का मुख्य कारण है।
प्रमुख तथ्य एक नजर में
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| पीड़िता | मुस्कान पत्नी नसीम (पौथेपुरवा, सुरसा) |
| घटना का समय | रविवार शाम 6:30 बजे से 7:05 बजे तक |
| एंबुलेंस संख्या | UP-32-FG-0942 |
| कर्मी | पायलट अरुण कुमार, ईएमटी रामजीवन |
| सहयोगी | बुजुर्ग महिला अनवरी पत्नी अनवर |
| अस्पताल | सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सुरसा |
| स्थिति | जच्चा-बच्चा पूरी तरह सुरक्षित और स्वस्थ |
यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि 102 एंबुलेंस सेवा न केवल समय पर इलाज पहुंचाने का माध्यम है, बल्कि जीवनरक्षक बनकर उभर रही है। पायलट अरुण कुमार और ईएमटी रामजीवन की तत्परता और साहस ने न केवल एक मां और नवजात की जान बचाई, बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र के प्रति विश्वास भी मजबूत किया। ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसी सेवाओं की तत्परता और प्रशिक्षण को और मजबूत करने की जरूरत है, ताकि हर गर्भवती महिला को समय पर सुरक्षित प्रसव का हक मिल सके।




