Sunday, February 1, 2026
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मनरेगा आपके काम करने के संवैधानिक अधिकार को करता है सुनिश्चित : सुरेंद्र पंवार

सोनीपत, रजनीकांत चौधरी | वेब वार्ता

मनरेगा योजना को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच सोनीपत से पूर्व विधायक सुरेंद्र पंवार ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) ग्रामीणों के काम करने के संवैधानिक अधिकार को सुनिश्चित करता है, लेकिन भाजपा सरकार इसमें बदलाव कर इस अधिकार को कमजोर करने की कोशिश कर रही है।

मनरेगा बचाओ संग्राम के तहत गांव-गांव पहुंचे नेता

पूर्व विधायक सुरेंद्र पंवार मनरेगा बचाओ संग्राम के तहत जिला कांग्रेस कमेटी (ग्रामीण) के अध्यक्ष संजीव दहिया के साथ ठरू, सांदल कलां, माहरा सहित अन्य गांवों में आयोजित कार्यक्रमों में शामिल हुए। इस दौरान ग्रामीणों ने कांग्रेस नेताओं का फूल मालाओं से भव्य स्वागत किया और कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणों की मौजूदगी रही।

मनरेगा में बदलाव को बताया मजदूर विरोधी

ग्रामीणों को संबोधित करते हुए सुरेंद्र पंवार ने कहा कि पहले मनरेगा के तहत हर परिवार को न्यूनतम 100 दिनों तक काम की कानूनी गारंटी मिलती थी, लेकिन अब सरकार इस गारंटी को खत्म करने की दिशा में बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि पहले हर गांव में काम की गारंटी थी, जबकि अब इसे चुनिंदा गांवों तक सीमित किया जा रहा है।

मनरेगा में प्रस्तावित बदलावों पर आपत्ति

पूर्व व्यवस्थाप्रस्तावित बदलाव
100 दिन की कानूनी काम की गारंटीकानूनी गारंटी समाप्त होने की आशंका
सालभर काम की मांग का अधिकारफसल कटाई के मौसम में काम नहीं
ग्राम पंचायत की प्रमुख भूमिकाग्राम पंचायत को दरकिनार करने की कोशिश

उन्होंने कहा कि इन बदलावों से गरीब, मजदूर और ग्रामीण वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित होगा। मनरेगा को कमजोर करना सीधे तौर पर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर चोट है।

काम, मजदूरी और जवाबदेही की गारंटी की मांग

पूर्व विधायक सुरेंद्र पंवार ने सरकार से मांग की कि काम की गारंटी, मजदूरी की गारंटी और जवाबदेही की गारंटी को स्पष्ट रूप से सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि मनरेगा केवल एक योजना नहीं, बल्कि गरीबों के लिए जीवनरेखा है।

न्यूनतम मजदूरी 400 रुपये करने की मांग

जिला कांग्रेस कमेटी (ग्रामीण) के अध्यक्ष संजीव दहिया ने कहा कि मनरेगा में किए गए सभी बदलावों को तत्काल वापस लिया जाना चाहिए। उन्होंने काम के संवैधानिक अधिकार की पूर्ण बहाली और मनरेगा मजदूरी को बढ़ाकर न्यूनतम 400 रुपये प्रतिदिन करने की मांग रखी।

ग्रामीणों ने दिया समर्थन

कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों ने मनरेगा बचाओ संग्राम में कांग्रेस पार्टी का साथ देने का भरोसा जताया और आंदोलन में बढ़-चढ़कर भाग लेने का आश्वासन दिया।

कार्यक्रम में रहे ये लोग मौजूद

इस मौके पर जिला पार्षद संजय बड़वासनी, विक्की पहलवान, हरिओम, कुलदीप देशवाल, रणदीप दहिया, पुनीत राणा, दिनेश हुड्डा, अशोक खत्री, रणबीर मलिक, सेठी मलिक, दयानंद बाल्मीकि, प्रवीन सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

निष्कर्ष

मनरेगा को लेकर उठी यह आवाज ग्रामीण रोजगार और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा बड़ा सवाल खड़ा करती है। आने वाले दिनों में यह आंदोलन और तेज हो सकता है, जिससे केंद्र सरकार पर नीतिगत फैसलों की समीक्षा का दबाव बढ़ने की संभावना है।

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