सोनीपत: दवा-टेंडर घोटाला: सोनीपत सिविल अस्पताल में करोड़ों की खरीद पर हेरफेर का आरोप, उच्चस्तरीय जांच की मांग

सोनीपत, राजेश आहूजा | वेब वार्ता

हरियाणा के सोनीपत सिविल अस्पताल में दवाइयों और मेडिकल सप्लाई की खरीद से जुड़े टेंडर में गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। सामाजिक कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता देवेंद्र गौतम ने 23 फरवरी 2026 को आरोप लगाया कि नियमों को दरकिनार कर चुनिंदा कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए टेंडर शर्तों में मनमाना बदलाव किया गया। उन्होंने इसे जनता के टैक्स के पैसे और मरीजों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ बताया।

गौतम के अनुसार यह मामला केवल वित्तीय अनियमितता नहीं, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

टेंडर नियमों में कथित मनमाना बदलाव

देवेंद्र गौतम ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग के टेंडर ऑनलाइन और खुली प्रतिस्पर्धा पर आधारित होने चाहिए थे। नियमों के अनुसार 50% खरीद में हरियाणा स्थित उद्योगों को वरीयता दी जानी चाहिए थी, लेकिन सीएमओ द्वारा शर्तों में बदलाव कर दिया गया।

  • 100 किमी रेडियस की अनिवार्य शर्त
  • EMD राशि ₹2 लाख से बढ़ाकर ₹5 लाख
  • बाहरी कंपनियों को स्वतः बाहर करना
  • आपत्तियों के बावजूद संशोधन नहीं

स्थानीय खरीद और सीमित आपूर्तिकर्ताओं पर आरोप

गौतम ने आरोप लगाया कि मार्च 2025 से फरवरी 2026 तक अधिकांश स्थानीय खरीद सीमित आपूर्तिकर्ताओं से की गई। प्रिंटिंग सामग्री और लैब केमिकल्स की खरीद में भी गुणवत्ता संबंधी शिकायतें सामने आई हैं।

चिकित्सकों द्वारा भी कई बार सामग्री की गुणवत्ता पर आपत्ति जताई गई, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

तीन कंपनियों को टेंडर देने पर सवाल

आरोप है कि दवा टेंडर प्रणव फार्मा, अल्बानिया लाइफ हेल्थ केयर और ऑर्थोटेक सर्जिकल को दिया गया, जो सभी करनाल जिले से जुड़ी हैं। तीनों कंपनियों के मालिकाना संबंध समान बताए जा रहे हैं।

कंपनीजिलाआरोप
प्रणव फार्माकरनालसमान स्वामित्व
अल्बानिया लाइफ हेल्थ केयरकरनालमिलीभगत का संदेह
ऑर्थोटेक सर्जिकलकरनालसमान दरें

गौतम का कहना है कि तीनों कंपनियों की दरों में केवल पैसे स्तर का अंतर दिखाया गया, जिससे प्रतिस्पर्धा पर संदेह पैदा होता है।

दवाओं की कीमतों में भारी अंतर का उदाहरण

उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि एक दवा ट्रानेक्सामिक एसिड 500 mg की दर पहले ₹558 प्रति टैबलेट दिखाई गई, जिसे विरोध के बाद ₹5.58 किया गया।

स्रोतदर (₹ प्रति टैबलेट)
टेंडर प्रारंभिक दर558
संशोधित दर5.58
अन्य कंपनी2.75
थोक बाजार1.20 – 1.35

उन्होंने इसे सरकारी धन की बड़ी बर्बादी बताया।

हस्ताक्षर और प्रक्रिया पर भी सवाल

देवेंद्र गौतम ने टेंडर फाइल में हस्ताक्षर विसंगतियों और फार्मेसी अधिकारियों की मंजूरी के अभाव पर भी सवाल उठाए। उन्होंने डिप्टी मेडिकल सुपरिंटेंडेंट से स्पष्टीकरण मांगा कि दर सूची पर हस्ताक्षर क्यों नहीं किए गए।

इसके साथ ही मरीजों को बाहर से दवा खरीदने के लिए पर्ची देने की शिकायतें भी सामने आई हैं।

सरकार से प्रमुख मांगें

देवेंद्र गौतम ने मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री से निम्न मांगें की हैं—

  • उच्चस्तरीय स्वतंत्र जांच
  • विजिलेंस इंक्वायरी और फॉरेंसिक ऑडिट
  • जिम्मेदार अधिकारियों पर FIR
  • संबंधित कंपनियों को ब्लैकलिस्ट
  • विवादित टेंडर निरस्त
  • भुगतान पर तत्काल रोक

जांच समिति का गठन पहले ही

गौतम ने बताया कि 18 फरवरी 2026 को महानिदेशक स्वास्थ्य सेवाएं हरियाणा द्वारा जांच समिति गठित की जा चुकी है। उन्होंने इसे सकारात्मक कदम बताया, लेकिन कहा कि जब तक दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती, जनता का भरोसा बहाल नहीं होगा।

उन्होंने सीएमओ पर राजनीतिक संरक्षण मिलने का भी आरोप लगाया और भ्रष्ट अधिकारियों के तबादले की मांग की।

आंदोलन की चेतावनी

देवेंद्र गौतम ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में भ्रष्टाचार केवल आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि मरीजों के जीवन से खिलवाड़ है। यदि जल्द ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो वे अनिश्चितकालीन धरना शुरू करेंगे।

निष्कर्ष

सोनीपत सिविल अस्पताल से जुड़ा यह मामला स्वास्थ्य व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और ईमानदारी पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। अब देखना होगा कि सरकार और प्रशासन इस पर कितनी सख्ती से कार्रवाई करता है।

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