Wednesday, January 28, 2026
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शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा- गोत्र ही हिंदुओं की पहचान, गौमाता को राष्ट्रमाता घोषित करने का संकल्प

सुपौल, अजय कुमार (वेब वार्ता)। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद : गौमाता के प्राणों की रक्षा और उन्हें राष्ट्रमाता घोषित कराने के लिए चल रहे राष्ट्रव्यापी धर्मांधोलन के अंतर्गत बिहार की गौमाता संकल्प यात्रा के दौरान सुपौल में सनातन धर्मियों को संबोधित करते हुए परम धर्माधीश ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज ने गोत्र को हिंदुओं की मूल पहचान बताया। उन्होंने कहा कि सनातनधर्मी को अपने गोत्र और उसके महत्व को कभी भूलना नहीं चाहिए, क्योंकि यह हमारी सांस्कृतिक और धार्मिक जड़ें हैं। शंकराचार्य जी ने उपस्थित जनसमुदाय को गौमाता की रक्षा के लिए मतदान करने का संकल्प दिलाया, जो इस आंदोलन की मुख्य मांग है।

गौमाता संकल्प यात्रा: सुपौल में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का जोरदार संदेश

सुपौल में आयोजित इस कार्यक्रम में हजारों गौभक्तों ने भाग लिया। शंकराचार्य जी महाराज को उनके प्रवास स्थल से पालकी में आरूढ़ कराकर कार्यक्रम स्थल तक ले जाया गया, जहां भक्तों ने पुष्पवर्षा और जयकारों से उनका स्वागत किया। सम्बोधन में शंकराचार्य जी ने गौमाता के महात्म्य पर प्रकाश डालते हुए कहा, “गौमाता 33 कोटि देवी-देवताओं की आश्रयस्थली है। हमारे जीवन में गुरु और ईश्वर का महत्व असीम है, लेकिन जब हम घर में भोजन बनाते हैं, तो पहली रोटी गौमाता के लिए ही बनाते हैं। नारायण हर युग में गौमाता की रक्षा के लिए अवतरित होते हैं। गोविंद की इस भूमि पर हम किसी भी कीमत पर गौमाता का रक्त नहीं गिरने देंगे।”

उन्होंने नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि पिछले 78 वर्षों से हमने नेताओं पर भरोसा किया, लेकिन उन्होंने गोकशी को रोकने के बजाय अपने स्वार्थ के लिए बढ़ावा दिया। अब समय आ गया है कि गौमाता के प्राणों की रक्षा के लिए हम मतदान करें, ताकि गोकशी के पाप से बचे रहें। शंकराचार्य जी ने उपस्थित गौभक्तों से दाहिना हाथ उठाकर गौमाता रक्षा के लिए मतदान का संकल्प दिलाया, जो कार्यक्रम का सबसे भावुक क्षण साबित हुआ।

यह संकल्प यात्रा गौहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध, गौमाता को राष्ट्रमाता घोषित करने, और गौसंरक्षण को राष्ट्रीय नीति बनाने की मांग को लेकर चल रही है। बिहार में यह यात्रा विभिन्न जिलों से गुजर रही है, और सुपौल इसका एक महत्वपूर्ण पड़ाव था।

फारबिसगंज की ओर प्रस्थान: भक्तों का स्वागत

कार्यक्रम के बाद शंकराचार्य जी महाराज फारबिसगंज पहुंचे, जहां मार्ग में कई स्थानों पर भक्तों ने पुष्पवर्षा और जयकारों से उनका अभिनंदन किया। कुछ स्थलों पर भक्तों ने उनके चरणपादुकाओं का पूजन कर अपना जीवन धन्य माना। फारबिसगंज में ही शंकराचार्य जी महाराज आज रात्रि विश्राम करेंगे। यह यात्रा बिहार के विभिन्न जिलों में गौभक्ति की लहर पैदा कर रही है।

अन्य वक्ताओं का संबोधन: गौरक्षा का संकल्प

कार्यक्रम में अन्य वक्ताओं ने भी गौमाता की रक्षा पर जोर दिया। प्रत्यक्ष चैतन्य मुकुंदानंद गिरी जी महाराज और स्वामी दिव्यानंद सागर जी ने गौसंरक्षण को सनातन धर्म का अभिन्न अंग बताया। देवेंद्र पांडेय, राजीव झा, रामकुमार झा, और शैलेंद्र योगी जी ने भी उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि गौमाता संरक्षण के बिना हिंदू समाज की पहचान अधूरी है, और इस आंदोलन से गौहत्या पर पूर्ण रोक लगेगी।

निष्कर्ष: गोत्र और गौमाता – सनातन की जड़ें

शंकराचार्य जी का यह संदेश सनातनधर्मियों के लिए एक जागृति का आह्वान है। गोत्र को याद रखना और गौमाता की रक्षा के लिए संकल्प लेना हमारी सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करेगा। यह यात्रा न केवल बिहार, बल्कि पूरे राष्ट्र में गौभक्ति की भावना को प्रज्वलित कर रही है। शंकराचार्य जी के नेतृत्व में यह आंदोलन गौमाता को राष्ट्रमाता बनाने की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रहा है।

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