आस्था और प्रकृति का अद्भुत संगम है रामकुंड
बांसवाड़ा, 27 मार्च 2026 (वेब वार्ता)। राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में एक ऐसा पवित्र स्थल मौजूद है, जो न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है बल्कि प्राकृतिक सुंदरता का भी बेमिसाल उदाहरण है। जिला मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर दूर पहाड़ियों के बीच बसा रामकुंड आदिवासी समाज की गहरी श्रद्धा और सदियों पुरानी मान्यताओं को समेटे हुए है।
गुफा में विराजमान हैं भगवान श्रीराम
ऊंची पहाड़ी की चोटी पर स्थित एक प्राकृतिक गुफा में भगवान श्रीराम, माता जानकी, लक्ष्मण और हनुमान की प्रतिमाएं स्थापित हैं। यहां तक पहुंचने के लिए ऊंची-ऊंची सीढ़ियां बनाई गई हैं। आसपास की कंदराओं में भी देवी-देवताओं की प्राचीन मूर्तियां मौजूद हैं, जिनमें कुछ समय के साथ खंडित हो चुकी हैं, लेकिन उनकी आस्था आज भी कायम है।
राम के बाण से निकली जलधारा की मान्यता
लोक मान्यता के अनुसार, वनवास काल में भगवान श्रीराम यहां से गुजरे थे। उस दौरान माता सीता को प्यास लगी, तब श्रीराम ने अपने बाण से पहाड़ पर प्रहार किया, जिससे जलधारा फूट पड़ी और एक कुंड का निर्माण हुआ। यही कुंड आज रामकुंड के नाम से प्रसिद्ध है। यहां आज भी चट्टानों से पानी रिसता रहता है और कुंड हमेशा भरा रहता है।
भीमकुंड से भी जुड़ी है पौराणिक कथा
रामकुंड की गुफाओं का एक सिरा आगे जाकर भीमकुंड से जुड़ता है। मान्यता है कि अज्ञातवास के दौरान पांडव यहां आए थे और भीम ने अपनी गदा से प्रहार कर इस कुंड का निर्माण किया था। इस प्रकार यह क्षेत्र रामायण और महाभारत दोनों कालखंडों से जुड़ा हुआ माना जाता है।
मानसून में दिखता है मनमोहक दृश्य
बरसात के मौसम में रामकुंड का नजारा बेहद आकर्षक हो जाता है। हरियाली से ढकी पहाड़ियां, बहता पानी और गुफाओं की शांति यहां आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को विशेष अनुभव कराती है।
पर्यटकों के लिए विकसित की जा रही सुविधाएं
रामकुंड विकास समिति के प्रयासों से यहां सामुदायिक भवन और अन्य आवश्यक सुविधाएं विकसित की गई हैं, जिससे श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर सुविधा मिल सके और यह स्थल पर्यटन के रूप में भी विकसित हो सके।



