Thursday, February 12, 2026
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पलनवाला, अखनूर में “हिन्दी है हिन्द की धड़कन” थीम पर वाद-विवाद प्रतियोगिता के साथ हिन्दी दिवस का उत्सव

जम्मू/अखनूर, (वेब वार्ता)। भारतीय सेना ने अखनूर के पलनवाला में सीमावर्ती क्षेत्र के एक स्कूल में हिन्दी दिवस के अवसर पर “हिन्दी है हिन्द की धड़कन” थीम के तहत एक वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन किया। 14 सितंबर 2025 को आयोजित इस कार्यक्रम में छात्रों ने “हिन्दी का महत्व” और “राष्ट्रीय एकता में भाषा का योगदान” जैसे विषयों पर उत्साहपूर्वक विचार व्यक्त किए। इस आयोजन ने सीमावर्ती क्षेत्र के युवाओं में हिन्दी भाषा के प्रति प्रेम और राष्ट्रीय एकता की भावना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

वाद-विवाद प्रतियोगिता: हिन्दी और राष्ट्रीय एकता पर जोर

पलनवाला के स्कूल में आयोजित इस वाद-विवाद प्रतियोगिता में सीमावर्ती क्षेत्र के छात्रों ने अपनी बौद्धिक क्षमता और हिन्दी भाषा के प्रति अपने लगाव का शानदार प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता में “हिन्दी का महत्व” विषय पर छात्रों ने हिन्दी को भारत की सांस्कृतिक पहचान और संवाद का एक शक्तिशाली माध्यम बताया। वहीं, “राष्ट्रीय एकता में भाषा का योगदान” विषय पर चर्चा में छात्रों ने बताया कि हिन्दी और अन्य क्षेत्रीय भाषाएं विविधता में एकता का प्रतीक हैं।

छात्रों ने अपने तर्कों को आत्मविश्वास के साथ प्रस्तुत किया और भाषा के माध्यम से सामाजिक और राष्ट्रीय एकीकरण को बढ़ावा देने के महत्व पर प्रकाश डाला। प्रतियोगिता में भाग लेने वाले छात्रों का जोश और उत्साह देखते ही बनता था।

पुरस्कार और प्रोत्साहन

प्रतियोगिता के विजेताओं को प्रमाण पत्र, ट्रॉफी, और प्रेरणादायक किताबें प्रदान की गईं। पुरस्कार वितरण समारोह में भारतीय सेना के अधिकारियों और स्थानीय समुदाय के नेताओं ने छात्रों की प्रशंसा की। सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “भाषा न केवल संवाद का माध्यम है, बल्कि यह हमारी संस्कृति और गौरव का प्रतीक भी है। हिन्दी जैसे आयोजनों के माध्यम से हम सीमावर्ती क्षेत्रों में शिक्षा और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

भारतीय सेना की भूमिका: शिक्षा और राष्ट्र निर्माण

भारतीय सेना ने इस आयोजन के माध्यम से न केवल हिन्दी भाषा को बढ़ावा दिया, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों में शिक्षा और बौद्धिक विकास को प्रोत्साहित करने की अपनी प्रतिबद्धता को भी दोहराया। सेना ने पलनवाला जैसे सुदूर क्षेत्रों में युवाओं के बीच सकारात्मक सोच, नेतृत्व, और राष्ट्रीय एकता की भावना को बढ़ावा देने के लिए कई पहल शुरू की हैं। इस वाद-विवाद प्रतियोगिता ने छात्रों में आत्मविश्वास और बौद्धिक क्षमता को विकसित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

स्थानीय समुदाय के नेताओं ने भारतीय सेना के इस प्रयास की सराहना की और कहा कि ऐसे आयोजन युवाओं को प्रेरित करते हैं और उन्हें समाज में सकारात्मक योगदान देने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। स्कूल के प्राचार्य ने भी सेना के सहयोग की प्रशंसा की और भविष्य में भी ऐसे आयोजनों की मांग की।

हिन्दी दिवस का महत्व

14 सितंबर को मनाया जाने वाला हिन्दी दिवस भारत में हिन्दी भाषा के महत्व को रेखांकित करता है। 1949 में संविधान सभा ने हिन्दी को भारत की आधिकारिक भाषा के रूप में स्वीकार किया था, और तब से हर साल इस दिन को हिन्दी के प्रचार-प्रसार और सम्मान के लिए समर्पित किया जाता है। पलनवाला में आयोजित यह वाद-विवाद प्रतियोगिता हिन्दी की सांस्कृतिक और राष्ट्रीय महत्व को उजागर करने का एक अनूठा प्रयास था।

निष्कर्ष: हिन्दी के प्रति प्रेम और राष्ट्रीय एकता

पलनवाला में भारतीय सेना द्वारा आयोजित यह वाद-विवाद प्रतियोगिता न केवल हिन्दी भाषा के प्रति प्रेम को बढ़ावा देने में सफल रही, बल्कि इसने सीमावर्ती क्षेत्र के युवाओं में राष्ट्रीय एकता और बौद्धिक विकास की भावना को भी प्रज्वलित किया। भारतीय सेना का यह प्रयास एक बार फिर दर्शाता है कि भाषा और शिक्षा के माध्यम से समाज को सशक्त बनाया जा सकता है।

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