उमर अब्दुल्ला ने साबरमती आश्रम में महात्मा गांधी को अर्पित की श्रद्धांजलि, कहा- “आज भी प्रासंगिक हैं बापू की शिक्षाएं”

अहमदाबाद, (वेब वार्ता)। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शुक्रवार को गुजरात के ऐतिहासिक साबरमती आश्रम का दौरा कर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने गांधी जी की प्रतिमा पर खादी की माला चढ़ाई और वहां चरखा चलाने का भी प्रयास किया।

गांधी आश्रम की यात्रा पर भावुक हुए उमर

उमर अब्दुल्ला ने अपनी यात्रा के अनुभव को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स (पूर्व ट्विटर)’ पर साझा किया। उन्होंने लिखा:

“राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के साबरमती आश्रम का भ्रमण करके मैं खुद को विनम्र और गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं। उनकी शिक्षाएं आज भी प्रासंगिक हैं और हमें उस दिशा की ओर ले जाती हैं, जिस ओर हमें जाना चाहिए, लेकिन हम ऐसा कम ही करते हैं।”

महात्मा गांधी को किया उद्धृत

उमर ने गांधी जी के एक विचार को उद्धृत करते हुए लिखा:

“सच्चा लोकतंत्र केंद्र में बैठे 20 लोगों द्वारा नहीं चलाया जा सकता। इसे जमीनी स्तर पर हर गांव के लोगों द्वारा चलाया जाना चाहिए।”

साबरमती आश्रम: एक ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

साबरमती आश्रम, जिसे गांधी आश्रम के नाम से भी जाना जाता है, 1917 में अहमदाबाद में महात्मा गांधी द्वारा स्थापित किया गया था। यह आश्रम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान कई बड़े आंदोलनों का गवाह रहा है, जिसमें दांडी यात्रा की योजना यहीं से बनाई गई थी।

गुजरात दौरे पर उमर अब्दुल्ला

उमर अब्दुल्ला बुधवार से गुजरात के पर्यटन कार्यक्रम पर हैं। इससे पहले उन्होंने नर्मदा जिले में स्थित ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ और सरदार सरोवर बांध का भी दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने जम्मू-कश्मीर में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न टूर संचालकों से भी बातचीत की।

पीएम मोदी ने सराहा उमर का दौरा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उमर अब्दुल्ला की गुजरात यात्रा की सराहना करते हुए सोशल मीडिया पर कहा:

“कश्मीर से केवड़िया! उमर अब्दुल्ला जी को साबरमती रिवरफ्रंट पर दौड़ का आनंद लेते और ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ का दौरा करते देखकर अच्छा लगा। उनकी यह यात्रा एकता का एक महत्वपूर्ण संदेश देती है और हमारे साथी भारतीयों को देश के विभिन्न हिस्सों की यात्रा करने के लिए प्रेरित करेगी।”


इस यात्रा का संदेश

उमर अब्दुल्ला की यह यात्रा सिर्फ एक राजनेता की व्यक्तिगत श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विविधता की एक खूबसूरत मिसाल है। बापू के विचारों की प्रासंगिकता और राष्ट्रीय एकता के संदेश को जीवंत करती यह यात्रा उन सभी नागरिकों को प्रेरित करती है जो भारत की आत्मा को जानना चाहते हैं।

‘यात्रा मन को व्यापक बनाती है,’ उमर अब्दुल्ला ने पीएम मोदी के संदेश पर दी प्रतिक्रिया

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