खरखौदा (सोनीपत), राजेश आहूजा | वेब वार्ता
प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से खरखौदा स्थित भरत वाटिका में आयोजित प्राकृतिक खेती समृद्ध किसान सम्मेलन में गुजरात व महाराष्ट्र के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने किसानों से रासायनिक खेती छोड़कर प्राकृतिक खेती अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती कम लागत में अधिक लाभ देने वाली, पर्यावरण हितैषी और दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ पद्धति है।
प्राकृतिक खेती के लाभों पर डाला प्रकाश
राज्यपाल ने कहा कि प्राकृतिक खेती पूरी तरह प्रकृति के नियमों पर आधारित है और इसका मूल आधार देसी गाय है। उन्होंने बताया कि देसी गाय के गोबर और गोमूत्र में करोड़ों की संख्या में लाभकारी सूक्ष्म जीवाणु पाए जाते हैं, जो मिट्टी की उर्वरता को पुनः जीवंत करते हैं।
उन्होंने वैज्ञानिक तथ्यों के साथ स्पष्ट किया कि प्राकृतिक खेती से भूमि की उत्पादकता बढ़ती है और किसानों की लागत में कमी आती है।
जीवामृत की विधि और उपयोगिता
आचार्य देवव्रत ने जीवामृत बनाने की विधि बताते हुए कहा कि देसी गाय का गोबर, गोमूत्र, गुड़, बेसन और खेत की मिट्टी से तैयार जीवामृत खेत में डालने से सूक्ष्म जीवाणुओं की संख्या तेजी से बढ़ती है।
इससे पौधों को आवश्यक पोषक तत्व मिलते हैं, केंचुओं की संख्या बढ़ती है और मिट्टी की जलधारण क्षमता में सुधार होता है।
प्राकृतिक खेती से होने वाले लाभ
| क्षेत्र | लाभ |
|---|---|
| मिट्टी की गुणवत्ता | उर्वरता और नमी में वृद्धि |
| किसान की लागत | कम खर्च में अधिक उत्पादन |
| पर्यावरण | प्रदूषण में कमी |
| जल संरक्षण | भूजल स्तर में सुधार |
उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती अपनाने से खेतों में मित्र कीट, केंचुए और सूक्ष्म जीवाणु लौटते हैं, जिससे मिट्टी नरम होती है और वर्षा जल का संरक्षण होता है।
रासायनिक खेती के दुष्परिणाम
राज्यपाल ने कहा कि अत्यधिक रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग से मिट्टी का ऑर्गेनिक कार्बन समाप्त हो रहा है, जिससे उत्पादन घट रहा है और किसानों की लागत बढ़ रही है।
उन्होंने चिंता जताई कि रासायनिक खेती के कारण कैंसर, हृदय रोग, मधुमेह और किडनी जैसी गंभीर बीमारियां बढ़ रही हैं।
सरकारी प्रयास और प्रशिक्षण
आचार्य देवव्रत ने बताया कि केंद्र सरकार ने प्राकृतिक खेती को राष्ट्रीय मिशन के रूप में अपनाया है। हरियाणा सरकार द्वारा भी प्रशिक्षण केंद्रों के माध्यम से किसानों को नि:शुल्क प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
उन्होंने किसानों से अपील की कि वे अपनी भूमि के कम से कम एक हिस्से में प्राकृतिक खेती की शुरुआत अवश्य करें।
विधायक पवन खरखौदा का संबोधन
विधायक पवन खरखौदा ने कहा कि यह सम्मेलन किसानों को नई ऊर्जा देने वाला है। उन्होंने स्वयं और अपने परिवार द्वारा प्राकृतिक खेती अपनाने का संकल्प लिया।
उन्होंने कहा कि फसल, नस्ल और किसानी को बचाना ही आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित करेगा।
- प्राकृतिक खेती से आय में वृद्धि
- मिट्टी और जल का संरक्षण
- स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव
- पर्यावरण संतुलन
निष्कर्ष
खरखौदा में आयोजित यह किसान सम्मेलन प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ। राज्यपाल आचार्य देवव्रत के मार्गदर्शन से किसानों में नई जागरूकता उत्पन्न हुई है। प्राकृतिक खेती न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और स्वस्थ समाज के निर्माण में भी अहम भूमिका निभाती है।
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