श्रीनगर, (वेब वार्ता)। जम्मू-कश्मीर पुलिस की काउंटर इंटेलिजेंस कश्मीर (CIK) विंग ने शनिवार को कश्मीर घाटी के सात जिलों—श्रीनगर, बारामूला, अनंतनाग, कुपवाड़ा, हंदवाड़ा, पुलवामा और शोपियां—में आठ स्थानों पर समन्वित छापेमारी की। यह कार्रवाई सोशल मीडिया के माध्यम से आतंकवाद के महिमामंडन से जुड़े PS CIK के FIR नंबर 3/2023 (IPC की धारा 505, 153A और UAPA की धारा 13, 18 के तहत) के मामले में सक्षम अदालत से प्राप्त तलाशी वारंट पर की गई। छापेमारी के दौरान 7 संदिग्धों को हिरासत में लिया गया, जो कथित तौर पर आतंकवादी गतिविधियों को सामाजिक कार्यकर्ता के भेष में बढ़ावा दे रहे थे।
यह ऑपरेशन जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी नेटवर्क को ध्वस्त करने की दिशा में एक बड़ा कदम है, जहां सोशल मीडिया का दुरुपयोग युवाओं को कट्टर बनाने के लिए किया जा रहा है। CIK ने कहा कि ये तत्व न केवल शांति भंग कर रहे हैं, बल्कि सीमा पार आतंकवाद के लिए सहायक भूमिका निभा रहे हैं। स्थानीय पुलिस और CRPF की सहायता से की गई इस कार्रवाई में इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, दस्तावेज और अन्य सामग्री बरामद की गई।
छापेमारी का पूरा विवरण: आतंकवाद महिमामंडन का नेटवर्क
CIK के प्रवक्ता ने बताया कि छापेमारी सात जिलों में आठ स्थानों पर एक साथ की गई। संदिग्ध तत्वों ने सोशल मीडिया पर फर्जी नैरेटिव फैलाकर युवाओं को कट्टर बनाने और सार्वजनिक शांति भंग करने की कोशिश की। FIR 3/2023 PS CIK के तहत यह जांच चल रही है, जो आतंकवादी स्लीपर सेल्स और भर्ती मॉड्यूल से जुड़ी है। जम्मू-कश्मीर पुलिस के CIK विंग ने कहा, “ये तत्व आतंकवाद को वैध सामाजिक गतिविधि के रूप में प्रस्तुत कर रहे थे, जो शांति के लिए खतरा हैं।”
प्रभावित जिले और कार्रवाई का दायरा
| जिला | छापेमारी की संख्या | प्रमुख खोज/सामग्री बरामद |
|---|---|---|
| श्रीनगर | 1 स्थान | इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, दस्तावेज |
| बारामूला | 1 स्थान | सोशल मीडिया अकाउंट्स से जुड़ी सामग्री |
| अनंतनाग | 1 स्थान | कट्टर सामग्री, मोबाइल डेटा |
| कुपवाड़ा | 1 स्थान | संदिग्ध दस्तावेज, लैपटॉप |
| हंदवाड़ा | 1 स्थान | कट्टर वीडियो, चैट लॉग्स |
| पुलवामा | 1 स्थान | आतंक प्रचार से जुड़े पोस्टर्स |
| शोपियां | 2 स्थान | 7 संदिग्ध हिरासत में, इलेक्ट्रॉनिक्स बरामद |
कुल 8 स्थान, 7 संदिग्ध हिरासत में। CIK ने कहा कि पूछताछ से और खुलासे होंगे।
आतंकवाद महिमामंडन का खतरा: सोशल मीडिया का दुरुपयोग
यह कार्रवाई जम्मू-कश्मीर में सोशल मीडिया के माध्यम से आतंकवाद को बढ़ावा देने के बढ़ते मामलों के बीच आई है। NCRB 2024 के अनुसार, कश्मीर में 1,500+ सोशल मीडिया से जुड़े आतंकवादी केस दर्ज हुए, जहां फर्जी नैरेटिव युवाओं को भर्ती के लिए इस्तेमाल होते हैं। CIK ने कहा, “ये तत्व शांति भंग करने और सीमा पार आतंकवाद के लिए सहायक हैं।” जम्मू-कश्मीर पुलिस का CIK विंग जम्मू और कश्मीर में सक्रिय है, जबकि SIA हाई-प्रोफाइल मामलों की जांच करती है।
पिछले महीनों में कश्मीर में कई छापेमारियां हुईं, जहां 20+ आतंकवादी गिरोहों को तोड़ा गया। यह ऑपरेशन आतंकवादी इकोसिस्टम को खत्म करने की रणनीति का हिस्सा है।
स्थानीय प्रतिक्रिया: शांति बहाली की सराहना
स्थानीय लोगों ने छापेमारी की सराहना की। एक निवासी ने कहा, “सोशल मीडिया पर कट्टरता फैलाने वाले तत्वों पर कार्रवाई जरूरी है। युवाओं को गुमराह होने से बचाना होगा।” J&K पुलिस ने अपील की, “संदिग्ध गतिविधियों की सूचना दें। हम शांति बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”




