शिमला, 02 अप्रैल (वेब वार्ता)। हिमाचल प्रदेश विधानसभा में शुक्रवार को कांग्रेस के ही विधायकों ने अपनी सरकार के कामकाज पर सवाल खड़े कर दिए। सड़क निर्माण में देरी और अव्यवस्था को लेकर उठे मुद्दों ने सरकार को असहज स्थिति में डाल दिया है।
देहरा से विधायक कमलेश ठाकुर ने प्रश्नकाल के दौरान अपने क्षेत्र में पांच सड़कों का निर्माण अधूरा होने का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस निजी कंपनी को यह कार्य सौंपा गया है, वह इसे गंभीरता से नहीं ले रही और क्षेत्र में अव्यवस्था का माहौल बना हुआ है।
धूल और रसायन से लोगों को परेशानी
विधायक ने कहा कि सड़क निर्माण के दौरान उड़ने वाली धूल से लोगों का पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है। इसके साथ ही निर्माण में इस्तेमाल किए जा रहे रसायनों से लोगों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने संबंधित कंपनी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
ब्लैकलिस्ट कंपनी को दिया गया काम
ज्वालामुखी से विधायक संजय रतन ने भी सरकार को घेरते हुए कहा कि जिस कंपनी को 26 सड़कों का ठेका दिया गया है, उसे उत्तराखंड में पहले ही ब्लैकलिस्ट किया जा चुका है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनी ने काम को आगे आउटसोर्स कर दिया है और स्वयं जिम्मेदारी नहीं निभा रही।
ठेकेदारों को प्राथमिकता देने की मांग
संजय रतन ने कहा कि उन्होंने इस कंपनी के खिलाफ तीन बार पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। इसके बावजूद कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने मांग की कि हिमाचल के स्थानीय ठेकेदारों को प्राथमिकता दी जाए और संबंधित कंपनी से काम वापस लिया जाए।
विधायकों ने यह भी आरोप लगाया कि कंपनी उच्च अधिकारियों से सांठगांठ कर काम की समयसीमा बढ़वा रही है, जबकि जमीनी स्तर पर काम में कोई प्रगति नहीं हो रही है। इस मुद्दे के उठने के बाद विधानसभा में सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं और अब इस मामले में आगे की कार्रवाई पर नजर बनी हुई है।



