बेंगलुरु | वेब वार्ता
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के नाम में बदलाव और इसके स्वरूप में संशोधन को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ कर्नाटक में राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री एवं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने स्पष्ट किया है कि जब तक मनरेगा की पूर्ण पुनर्बहाली नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
‘राजभवन चलो – मनरेगा बचाओ संघर्ष’ में गरजे शिवकुमार
डीके शिवकुमार मंगलवार को बेंगलुरु में फ्रीडम पार्क से राजभवन तक आयोजित “राजभवन चलो – मनरेगा बचाओ संघर्ष” आंदोलन में शामिल हुए। आंदोलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मनरेगा केवल एक योजना नहीं, बल्कि गरीबों के रोजगार और अधिकार की गारंटी है। उन्होंने कहा, “हम किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि गरीबों के हक के लिए लड़ रहे हैं।”
मनरेगा की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का किया जिक्र
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने ग्रामीण गरीबों को मजदूरी आधारित रोजगार देने के उद्देश्य से मनरेगा योजना लागू की थी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2013 में विश्व बैंक ने मनरेगा को एक उत्कृष्ट और प्रभावी योजना के रूप में मान्यता दी थी।
शिवकुमार के अनुसार, उस दौर में राज्य की करीब 6,000 पंचायतों में प्रतिवर्ष लगभग 6 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे थे और यह निर्णय पूरी तरह पंचायत स्तर पर लिया जाता था कि किस क्षेत्र में कौन सा विकास कार्य किया जाएगा।
केंद्र पर बदली हुई वित्तीय संरचना का आरोप
| बिंदु | पुरानी व्यवस्था | नई व्यवस्था (आरोप) |
|---|---|---|
| योजना का नाम | मनरेगा | नाम परिवर्तन |
| अनुदान संरचना | केंद्र की प्रमुख भूमिका | 60% केंद्र, 40% राज्य |
| निर्णय प्रक्रिया | पंचायत स्तर | केंद्र-निर्भर |
डीके शिवकुमार ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने मनरेगा का नाम हटाकर उसे नए स्वरूप में लागू कर दिया है, जिससे राज्यों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डाला जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस विषय पर विधानसभा का विशेष सत्र भी बुलाया गया है।
भाजपा पर गांधी के नाम को लेकर तीखा हमला
भाजपा पर निशाना साधते हुए शिवकुमार ने कहा कि आज भाजपा नेता गांधी प्रतिमा के सामने धरना दे रहे हैं, जबकि उनके कार्यालयों में गांधीजी की तस्वीर लगाने की अनुमति तक नहीं है। उन्होंने कहा, “गांधीजी को सिर्फ गोडसे ने नहीं, बल्कि भाजपा और एनडीए मिलकर खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन गांधीजी को कोई समाप्त नहीं कर सकता।”
उन्होंने याद दिलाया कि गांधीजी का सपना था कि हर गांव में स्कूल, सहकारी संस्था और सशक्त पंचायत हो। मनरेगा उसी ग्राम स्वराज की अवधारणा का हिस्सा है।
आंदोलन की अगली रणनीति का ऐलान
डीके शिवकुमार ने आंदोलन को और तेज करने का ऐलान करते हुए कहा कि राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा जाएगा। इसके साथ ही आने वाले दिनों में राज्य के प्रत्येक तालुका में 5 किलोमीटर लंबी पदयात्रा आयोजित की जाएगी।
- हर तालुका में पदयात्रा
- विधायक, मंत्री और सांसद होंगे शामिल
- मनरेगा पुनर्बहाली तक आंदोलन जारी
निष्कर्ष
मनरेगा को लेकर कर्नाटक में शुरू हुआ यह आंदोलन अब केवल राज्य तक सीमित नहीं रह गया है। डीके शिवकुमार के आक्रामक रुख से यह स्पष्ट है कि कांग्रेस मनरेगा को राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा बनाकर केंद्र सरकार पर दबाव बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है। आने वाले दिनों में यह संघर्ष राष्ट्रीय स्तर पर भी असर दिखा सकता है।
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