सोनीपत, राजेश आहूजा | वेब वार्ता
हरियाणा के सोनीपत में एक सामाजिक कार्यकर्ता के खिलाफ दर्ज मुकदमे ने लोकतंत्र, नागरिक अधिकारों और जनहित के सवालों को एक बार फिर केंद्र में ला खड़ा किया है। न्याय युद्ध मंच के संस्थापक और सामाजिक कार्यकर्ता देवेंद्र गौतम ने अपने ऊपर दर्ज एफआईआर को न सिर्फ झूठा और मनगढ़ंत बताया है, बल्कि इसे सत्ता के दबाव में रची गई साजिश करार दिया है। इस मामले को लेकर विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने भी खुलकर समर्थन जताया है।
क्या है पूरा मामला
देवेंद्र गौतम के अनुसार, थाना सेक्टर-27 में उनके खिलाफ जिस घटना को आधार बनाकर मुकदमा दर्ज किया गया है, उसका पूरा घटनाक्रम वीडियो रिकॉर्डिंग में सुरक्षित है। उन्होंने बताया कि नगर निगम की एक टीम मौके पर जेसीबी मशीन लेकर पहुंची थी, जो सार्वजनिक सड़क पर खड़ी थी। इस दौरान उन्होंने केवल जनहित से जुड़े सवाल पूछे थे।
उन सवालों में मुख्य रूप से यह शामिल था—
क्या जेसीबी चालक के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस है?
क्या मशीन के सभी जरूरी दस्तावेज पूरे हैं?
सार्वजनिक सड़क पर मशीन खड़ी होने से यदि कोई दुर्घटना होती है, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?
देवेंद्र गौतम ने स्पष्ट किया कि ये सभी सवाल मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों और वरिष्ठ नगर निगम अधिकारियों की उपस्थिति में पूछे गए थे।
24 दिन बाद दर्ज हुई शिकायत
देवेंद्र गौतम का आरोप है कि घटना के 24 दिन बाद, राजनीतिक दबाव में नगर निगम के सहायक अभियंता द्वारा उनके खिलाफ झूठी शिकायत दी गई। उन्होंने कहा कि पुलिस ने बिना समुचित जांच किए सीधे मुकदमा दर्ज कर लिया, जो कानून और निष्पक्षता दोनों पर सवाल खड़े करता है।
प्रेस वार्ता में विपक्ष का समर्थन
इस पूरे प्रकरण को लेकर आयोजित प्रेस वार्ता में राजनीतिक और सामाजिक हलकों की मौजूदगी ने इसे और गंभीर बना दिया। प्रेस वार्ता में—
कांग्रेस शहरी जिला अध्यक्ष कमल दीवान
सोनीपत के पूर्व विधायक सुरेंद्र पवार
इनेलो जिला अध्यक्ष कुणाल गहलोत
कई सामाजिक व धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि
मौजूद रहे।
संविधान और लोकतांत्रिक अधिकारों की बात
कांग्रेस शहरी जिला अध्यक्ष कमल दीवान ने कहा कि भारतीय संविधान हर नागरिक को लोकतांत्रिक तरीके से आवाज़ उठाने का अधिकार देता है। लेकिन मौजूदा समय में उसी संविधान को कमजोर करने की कोशिशें हो रही हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी लगातार देशभर में तानाशाही सोच के खिलाफ आवाज़ उठा रहे हैं और देवेंद्र गौतम पर दर्ज मुकदमा इसी संविधान-विरोधी मानसिकता का परिणाम है।
कमल दीवान ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी इस लड़ाई में देवेंद्र गौतम के साथ मजबूती से खड़ी है और किसी भी कीमत पर लोकतांत्रिक आवाज़ को दबने नहीं देगी।
“यह मामला हर सवाल पूछने वाले नागरिक का है”
पूर्व विधायक सुरेंद्र पवार ने इस मामले को और व्यापक संदर्भ में देखा। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ देवेंद्र गौतम का मामला नहीं है, बल्कि हर उस नागरिक का है जो सरकार से सवाल पूछने का साहस करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार संविधान प्रदत्त विरोध और सवाल करने के अधिकार को खत्म करना चाहती है।
सुरेंद्र पवार ने कहा कि देवेंद्र गौतम ने शनि मंदिर अंडरपास, जलभराव और गंदगी जैसी गंभीर समस्याओं को लेकर सोनीपत की आवाज़ सरकार तक पहुंचाई, लेकिन बदले में उन्हें एफआईआर थमा दी गई।
जनहित बनाम सत्ता का टकराव
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि क्या जनहित में सवाल उठाना अपराध बनता जा रहा है? देवेंद्र गौतम का दावा है कि उनका उद्देश्य केवल सुरक्षा और जवाबदेही सुनिश्चित करना था, न कि किसी अधिकारी को बदनाम करना।
देवेंद्र गौतम के खिलाफ दर्ज मुकदमा अब केवल एक कानूनी मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह लोकतंत्र, नागरिक अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की बहस का प्रतीक बन गया है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि जांच किस दिशा में जाती है और क्या जनहित में उठाई गई आवाज़ों को न्याय मिल पाता है या नहीं।
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