भिवानी, रजनीकांत चौधरी (वेब वार्ता)। हरियाणा के भिवानी जिले के गाँव देवराला में हरियाणा पब्लिक स्कूल में हरियाणा राज्य बाल कल्याण परिषद की ओर से एक सेमिनार का आयोजन किया गया। बाल सलाह, परामर्श एवं कल्याण केंद्र के तत्वावधान में आयोजित इस सेमिनार में किशोर विद्यार्थियों के लिए खेल और कहानियों के माध्यम से सामाजिक और भावनात्मक कौशल विकसित करने पर जोर दिया गया। मुख्य वक्ता मंडलीय बाल कल्याण अधिकारी रोहतक व राज्य नोडल अधिकारी अनिल मलिक ने बच्चों की सुरक्षा और उनके सर्वांगीण विकास पर प्रकाश डाला।
खेल और कहानियों का महत्व
अनिल मलिक ने कहा, “खेल-विधियों और कहानियों के माध्यम से हम बच्चों की उम्र के हिसाब से उनमें सामाजिक व भावनात्मक कौशल विकसित कर सकते हैं। इससे वे सहानुभूति सीखते हैं और सुरक्षित व सहायक माहौल में अपनी भूमिका समझते हैं।” उन्होंने बाल अधिकारों के प्रति जागरूकता की अपील करते हुए कहा कि बच्चों को शोषण, उपेक्षा, तिरस्कार, उत्पीड़न और दुर्भावना से बचाने के लिए समाज को सक्रिय होना होगा।
उन्होंने बाल श्रम, बाल विवाह, बाल तस्करी, और यौन उत्पीड़न जैसी शोषणकारी गतिविधियों से बच्चों की रक्षा के लिए निरंतर जागरूकता की आवश्यकता पर बल दिया। मलिक ने कहा, “बच्चों को भावनात्मक, शारीरिक, मानसिक, और सामाजिक विकास को नुकसान पहुंचाने वाले तत्वों से बचाना होगा। परिवार, पड़ोस, दोस्त, रिश्तेदार, समुदाय, और संस्थाएं मिलकर एक मजबूत सुरक्षा घेरा बनाएं।”
परामर्श और भावनात्मक मजबूती
परामर्शदाता नीरज कुमार ने किशोरों को भावनात्मक मजबूती के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि उन्हें अपनी समझ बढ़ानी चाहिए और अपने मन की बात माता-पिता से साझा करनी चाहिए। उन्होंने किशोरों से अपील की कि वे किसी भी तरह की समस्या को खुले मन से परिवार के साथ चर्चा करें।
सेमिनार की अध्यक्षता
जिला बाल कल्याण अधिकारी ओमप्रकाश ने सेमिनार की अध्यक्षता करते हुए कहा, “यह सेमिनार इंसान के व्यवहार को समझने और किशोरावस्था के मुद्दों के प्रति जागरूकता बढ़ाने में अत्यंत सराहनीय रहा।” उन्होंने बच्चों की सुरक्षा और कल्याण के लिए सामाजिक जिम्मेदारी निभाने की अपील की।
विशेष उपस्थिति
कार्यक्रम में उप-प्राचार्य ललित बैरागी, राज्य बाल कल्याण परिषद के आजीवन सदस्य नीरज कुमार, सुदेश कुमार, और शिवानी सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।
निष्कर्ष
देवराला में आयोजित यह सेमिनार बच्चों की सुरक्षा, जागरूकता, और सर्वांगीण विकास के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ। खेल और कहानियों के माध्यम से किशोरों में सामाजिक और भावनात्मक कौशल विकसित करने की पहल ने न केवल जागरूकता बढ़ाई, बल्कि समुदाय को एकजुट कर बाल शोषण के खिलाफ मजबूत कदम उठाने की प्रेरणा दी।








