सोनीपत, राजेश आहूजा | वेब वार्ता
स्वदेशी उद्योगों के बल पर आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने की दिशा में हरियाणा से एक सशक्त और स्पष्ट संदेश पूरी दुनिया तक पहुंचाने का प्रयास तेज हो गया है। दीन बंधू छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (डीसीआरयूएसटी) मुरथल में बलिदानी दादा कुशल सिंह दहिया (बीडीकेएसडी) स्किलिंग एंड इकोनॉमिक डेवलपमेंट काउंसिल द्वारा ‘स्वदेशी उद्योग, विकसित भारत’ विषय पर आयोजित प्रशिक्षण सेमिनार ने इस संकल्प को और मजबूती दी।
सेमिनार का शुभारंभ मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के ओएसडी वीरेंद्र बड़खालसा ने किया। उन्होंने कहा कि स्वदेशी केवल एक भावना नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना, आत्मसम्मान और आर्थिक गौरव का प्रतीक है। हरियाणा सरकार की ‘सिंगल विंडो सिस्टम’ और ‘गो ग्लोबल अप्रोच’ के माध्यम से प्रदेश के उद्यमियों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर आगे बढ़ने के लिए हरसंभव सहयोग दिया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि देसी उद्योगों की मजबूती ही विकसित भारत की असली नींव है।
मुख्य वक्ता डॉ. राज नेहरू का प्रेरक संदेश
मुख्य वक्ता डॉ. राज नेहरू ने कहा कि सच्ची शिक्षा वही है जो व्यक्ति को अपने पैरों पर खड़ा होना सिखाए। वर्ष 2026 का ‘विकसित हरियाणा’ रोडमैप पूरी तरह आत्मनिर्भरता, कौशल विकास और वैश्विक मानकों पर आधारित है। उन्होंने युवाओं से ‘सीखो-सिखाओ’ की भावना अपनाकर अपनी क्षमताओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने का आह्वान किया।
तंजानिया तक फैला हरियाणा का व्यापारिक परचम
विदेश सहयोग विभाग के सलाहकार पवन चौधरी ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार के अवसरों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि हरियाणा और तंजानिया के बीच व्यापारिक संबंधों में पिछले वर्ष 18 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने बताया कि तंजानिया में एग्रो-इक्विपमेंट, माइनिंग, प्लाईवुड और आईटी स्किलिंग जैसे क्षेत्रों में हरियाणा के उद्यमियों के लिए असीम संभावनाएं मौजूद हैं।
हाल के महीनों में हरियाणा के निवेशकों द्वारा तंजानिया में ग्रीन इंपेक्स लिमिटेड और जय दादा धोला ग्रुप जैसी कंपनियों का पंजीकरण देसी उद्योगों की वैश्विक उड़ान का मजबूत प्रमाण है। हैफेड ने तंजानिया में अपना स्टोर स्थापित कर 10 हजार टन चावल के निर्यात का लक्ष्य सफलतापूर्वक पूरा किया है, जिससे हरियाणा के कृषि उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली है। वहीं, हरियाणा के प्लाईवुड उद्योग अब तंजानिया से कच्चा माल प्राप्त कर उत्पादन लागत कम कर रहे हैं, जिससे वैश्विक बाजार में उनकी प्रतिस्पर्धा और मजबूती बढ़ी है।
कौशल प्रमाण पत्र वितरण और भविष्य की योजना
कार्यक्रम के अंत में बीडीकेएसडी काउंसिल द्वारा युवाओं को कौशल प्रमाण पत्र वितरित किए गए। उन्हें विदेशी बाजारों में व्यापार विस्तार, निर्यात प्रक्रियाओं और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्किंग के लिए मार्गदर्शन देने का आश्वासन दिया गया। आयोजकों ने स्पष्ट किया कि आने वाले समय में ऐसे और कार्यक्रम आयोजित कर हरियाणा को स्वदेशी उद्योगों का वैश्विक हब बनाया जाएगा।
समारोह में मौजूद गणमान्य व्यक्ति
सेमिनार में प्रदेश के नीति-निर्धारक, उद्योग विशेषज्ञ, अंतरराष्ट्रीय व्यापार सलाहकार और बड़ी संख्या में युवा उद्यमी शामिल हुए। मंच से युवाओं को आत्मनिर्भर बनने, आधुनिक कौशल अपनाने और देसी उद्योगों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने का आह्वान किया गया।
प्रमुख बिंदु एक नजर में
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| मुख्य संदेश | स्वदेशी उद्योगों से विकसित हरियाणा-विकसित भारत |
| शुभारंभकर्ता | मुख्यमंत्री के ओएसडी वीरेंद्र बड़खालसा |
| मुख्य वक्ता | डॉ. राज नेहरू (विकसित हरियाणा रोडमैप 2026) |
| अंतरराष्ट्रीय संबंध | हरियाणा-तंजानिया व्यापार में 18% वृद्धि |
| प्रमुख निर्यात | चावल (10 हजार टन लक्ष्य पूरा), प्लाईवुड, एग्रो-इक्विपमेंट |
| भविष्य योजना | हरियाणा को स्वदेशी उद्योगों का वैश्विक हब बनाना |
यह सेमिनार हरियाणा के युवाओं और उद्यमियों के लिए एक नया अध्याय खोलने वाला साबित हुआ। मुख्यमंत्री के ओएसडी वीरेंद्र बड़खालसा के शुभारंभ और डॉ. राज नेहरू के प्रेरक संदेश से युवाओं में आत्मनिर्भरता और वैश्विक सोच का संचार हुआ। तंजानिया जैसे देशों तक हरियाणा के उत्पादों और उद्योगों की पहुंच बढ़ना राज्य की आर्थिक शक्ति और स्वदेशी नीति की सफलता का प्रमाण है। बीडीकेएसडी काउंसिल के इन प्रयासों से हरियाणा अब वैश्विक स्तर पर स्वदेशी उद्योगों का मजबूत केंद्र बनने की ओर तेजी से अग्रसर है।




