अंबाला के नागरिक अस्पताल में ‘रोटी बैंक’ बना सहारा, मरीजों और तीमारदारों को मिलता है मुफ्त पौष्टिक भोजन

अंबाला, हरियाणा डेस्क | वेब वार्ता

जब किसी परिवार का सदस्य अस्पताल में भर्ती होता है, तो उसके साथ रहने वाले परिजनों के सामने सबसे बड़ी समस्या भोजन की होती है। इसी जरूरत को समझते हुए अंबाला छावनी के नागरिक अस्पताल में ‘रोटी बैंक’ नामक पहल शुरू की गई, जो आज मरीजों और उनके तीमारदारों के लिए एक बड़ा सहारा बन चुकी है। यह संस्था पिछले 9 वर्षों से लगातार निशुल्क और पौष्टिक भोजन उपलब्ध करवा रही है।

2017 में हुई थी शुरुआत, आज 300 से ज्यादा सदस्य

‘रोटी बैंक’ की शुरुआत 15 मार्च 2017 को 10 सदस्यों के छोटे से समूह ने की थी। स्वास्थ्य विभाग ने इस सेवा के लिए अस्पताल परिसर में खाना बनाने हेतु एक कमरा उपलब्ध कराया। समय के साथ यह पहल बढ़ती गई और आज संस्था से जुड़े सदस्यों की संख्या 300 से अधिक हो चुकी है, जो निरंतर सेवा कार्य में लगे हुए हैं।

सेवा का विस्तार और वर्तमान व्यवस्था

सेवा पहलविवरण
शुरुआत वर्ष2017
सदस्यों की संख्या300+
भोजन वितरणदिन में 5 बार
सेवा शुल्कपूरी तरह निशुल्क

दिन में पांच बार मिलता है भोजन

संस्था के प्रधान अरुण खन्ना के अनुसार, मरीजों और उनके साथ आने वाले तीमारदारों को दिन में पांच बार भोजन उपलब्ध कराया जाता है। इसमें सुबह का नाश्ता, दोपहर और रात का खाना, शाम को हल्दी वाला दूध और फल भी शामिल होते हैं। भोजन पूरी तरह घर जैसा और स्वच्छ तरीके से तैयार किया जाता है।

  • सुबह चाय-नाश्ता
  • दोपहर का भोजन (रोटी, सब्जी, दाल-चावल)
  • शाम को हल्दी वाला दूध
  • रात का भोजन
  • फल और अतिरिक्त डाइट

डाइटिशियन की सलाह से तैयार होता है खाना

संस्था द्वारा तैयार किया जाने वाला भोजन डाइटिशियन की सलाह के अनुसार बनाया जाता है, ताकि मरीजों को संतुलित और पौष्टिक आहार मिल सके। खास मौकों जैसे नवरात्र के दौरान व्रत रखने वालों के लिए विशेष भोजन भी तैयार किया जाता है।

पूरी तरह निशुल्क सेवा, लोगों का सहयोग भी मिलता है

रोटी बैंक की यह सेवा पूरी तरह निशुल्क है। संस्था के सदस्य अपनी क्षमता के अनुसार योगदान करते हैं। कई बार ठीक होकर जाने वाले मरीज या उनके परिजन भी इस सेवा में सहयोग देकर इसे आगे बढ़ाने में मदद करते हैं।

निष्कर्ष

अंबाला का ‘रोटी बैंक’ समाज सेवा का एक उत्कृष्ट उदाहरण बनकर सामने आया है। यह पहल न केवल जरूरतमंदों की भूख मिटा रही है, बल्कि मानवता और सहयोग की भावना को भी मजबूत कर रही है। ऐसे प्रयास अन्य शहरों के लिए भी प्रेरणा बन सकते हैं।


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