नारी शक्ति : नवयुग की ध्वजवाहक

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एटा, सुनील यादव (वेब वार्ता)। प्रत्येक वर्ष 8 मार्च को हम अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में नारी सशक्तिकरण, समानता और गरिमा का उत्सव मनाते हैं। “यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते, रमन्ते तत्र देवताः” – इस वैदिक उद्घोषणा में नारी की महत्ता का प्रतिपादन है। किन्तु, समाज की रूढ़ियों ने महिलाओं को अनेक सीमाओं में बाँधने का प्रयत्न किया है।

उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग, नारी कल्याणार्थ सतत कार्यरत एक संस्थान, इस दिशा में अविरल प्रयास कर रहा है। हमारा संकल्प केवल अधिकारों का उद्घोष करना नहीं, अपितु इन्हें वास्तविकता के धरातल पर मूर्तरूप प्रदान करना है। महिलाओं के प्रति हिंसा, सामाजिक भेदभाव, शोषण तथा अशिक्षा की प्राचीर को ध्वस्त करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है।

आयोग के विभिन्न कार्यक्रमों एवं योजनाओं के माध्यम से हम महिलाओं को उनके संवैधानिक अधिकारों से अवगत कराते हुए उन्हें आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर कर रहे हैं। परामर्श केंद्रों, विधिक सहायता शिविरों एवं जागरूकता अभियानों के माध्यम से हम प्रत्येक नारी को यह संदेश देना चाहते हैं कि वह केवल समाज की सहचरी नहीं, अपितु उसकी दिशा निर्धारित करने वाली शक्ति भी है।

अब समय आ गया है कि हम नारियों को केवल सहानुभूति नहीं, अपितु उनके सामर्थ्य को पहचानने का अवसर दें। जब नारी शिक्षित, सशक्त और आत्मनिर्भर होगी, तभी समाज वास्तविक प्रगति की ओर अग्रसर होगा। इस महिला दिवस पर हम संकल्प लें कि हर नारी को सुरक्षा, समानता और स्वतंत्रता का अधिकार दिलाने हेतु हम सतत प्रयासरत रहेंगे। नारी नहीं, अब शक्ति का उद्घोष होगा।
जय हिन्द, जय भारत !!

श्रीमती रेनू गौड़
सदस्या, उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग

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