एनएससीबीएम महाविद्यालय में एमबीए, एमसीए कोर्स शुरू होंगे : सुक्खू

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शिमला, (वेब वार्ता)। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेमोरियल महाविद्यालय, हमीरपुर के वार्षिक कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय में एमबीए और एमसीए कोर्स शुरू करने के साथ-साथ अगले सत्र से इतिहास व पॉलिटिकल साईंस के पीजी कोर्स शुरू करने की घोषणा की। उन्होंने महाविद्यालय के सिंटेथिक ट्रैक को ठीक करने और 100 लड़कियों के लिए छात्रावास बनाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि हमीरपुर में को-एजेकुशेन राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला शुरू की जाएगी और इसे राजीव गांधी राजकीय आदर्श डे-बोर्डिंग स्कूल के रूप में विकसित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि नादौन और भोरंज में राजीव गांधी राजकीय आदर्श डे-बोर्डिंग स्कूल अगले साल से शुरू हो जाएगा और बाकी विधानसभा क्षेत्रों में भी डे-बोर्डिंग स्कूल खोले जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विद्यार्थियों की सुविधा के लिए स्मार्ट क्लासरूम बनाए जा रहे हैं। शिक्षा विभाग सहित हर विभाग की निगरानी सीएम डैशबोर्ड के माध्यम से की जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने पिछले दो माह से प्रदेश भर में नशे के खिलाफ अभियान चलाया है और नशे के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई है। नशा माफिया के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा रही है और वर्तमान राज्य सरकार युवाओं को नशे की दलदल में जाने से रोकने के लिए हर संभव कदम उठा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा ‘‘मैं आम परिवार से निकल कर मुख्यमंत्री की कुर्सी पर पहुंचा हूं। इसलिए जो वर्ग अपनी आवाज नहीं उठा सकता, उनके लिए काम कर रहा हूं। मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद अनाथ बेटियों से मिलने के लिए टूटीकंडी बालिका आश्रम गया। पहला निर्देश दिया कि जो बच्चे अपने माता-पिता को खो चुके हैं, उनके आत्मविश्वास को बढ़ाना है। इसलिए, प्रदेश सरकार ने इन बच्चों के हितों की रक्षा के लिए देश का पहला कानून बनाया, जिसमें उनकी देखभाल की जिम्मेदारी राज्य सरकार की है। यही नहीं, विधवाओं के बच्चों को फ्री शिक्षा प्रदान करने के लिए मुख्यमंत्री सुख शिक्षा योजना आरंभ की गई हैं।’’

‘पूर्व सरकार ने बांटी रेवड़ियां’

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली भाजपा सरकार ने चुनाव जीतने के लिए 5000 करोड़ रुपए की रेवड़ियां बांट दी। पिछली भाजपा सरकार की नीतियों के कारण प्रदेश में गुणात्मक शिक्षा का स्तर गिरा। चुनावी लाभ के लिए बिना बजट प्रावधान नए शिक्षण संस्थान खोल दिए और पुराने संस्थानों से अध्यापकों को नए संस्थानों में भेजा गया। इससे न तो नए संस्थानों में बच्चों को सुविधाएं मिली और पुराने संस्थानों को भी शिक्षकों की कमी से जूझना पड़ा। आज हालात यह है कि पांचवीं की कक्षा का विद्यार्थी दूसरी कक्षा की किताब नहीं पढ़ सकता। इस स्थिति में सुधार लाने के लिए राज्य सरकार ने अनेक कदम उठाए हैं। वर्तमान राज्य सरकार ने शिक्षण संस्थानों का युक्तिकरण करने का फैसला लिया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्री-नर्सरी से लेकर जमा दो तक एक ही निदेशालय बनाने की अधिसूचना जल्द ही करने जा रही है।

सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा, ‘‘मैं शिमला महाविद्यालय में पढ़ा हूं और हमीरपुर के उपायुक्त मेरे साथ महाविद्यालय में पढ़ा करते थे। हमीरपुर महाविद्यालय से कई नामी व्यक्ति पढ़े हैं, लेकिन आज महाविद्यालय में आकर मैंने अनुभव किया कि विद्यार्थियों में आत्मविश्वास की कमी है। इसलिए राज्य सरकार ने फैसला किया है कि मेरिट ही नहीं अन्य गतिविधियों के आधार पर महाविद्यालयों की रैंकिंग की जाएगी। आज जो भी राज्य सरकार फैसला कर रही है, वह विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए है। विद्यार्थियों में अगर इच्छाशक्ति मजबूत होगी तो सफलता अपने आप मिलेगी।’’

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी राज्य सरकार सुधार ला रही है। अस्पतालों में 20-20 साल पुरानी मशीनें लगी हैं, जिससे मरीजों को सही इलाज नहीं मिल पाता। लेकिन वर्तमान राज्य सरकार स्वास्थ्य संस्थानों में हाई-एंड टेक्नोलॉजी लाने जा रही है। उन्होंने कहा कि हमीरपुर में कैंसर अस्पताल के लिए 85 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं। हिमाचल प्रदेश आज बदलाव के दौर से गुजर रहा है। राज्य सरकार के प्रयासों से आज लड़कियों के प्रति समाज की सोच में बदलाव आया है और हमीरपुर जिले में लिंगानुपात में सुधार आया है।

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