Thursday, February 12, 2026
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श्रावण मास की शिवमहापुराण कथा का भव्य समापन — कैलाश मुक्ति के राष्ट्रीय संकल्प के साथ कार्यक्रम संपन्न

भिंड, मुकेश शर्मा (वेब वार्ता)। श्रावण मास के पावन अवसर पर बोरेश्वर महादेव धाम, अटेर में आयोजित सात दिवसीय श्री शिवमहापुराण कथा ज्ञानयज्ञ का आज दिव्य और भव्य समापन हुआ। यह आयोजन केवल धार्मिक कथा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह “कैलाश मुक्ति” के राष्ट्रधर्मी आह्वान के साथ एक सांस्कृतिक और सामाजिक चेतना का महाअभियान बन गया।

धर्म, साधना और राष्ट्रजागरण का संगम

सात दिवसीय कथा का केंद्र बिंदु रहा — कैलाश मुक्ति अभियान, जिसे भारत तिब्बत सहयोग मंच ने राष्ट्रीय चेतना से जोड़ा। आयोजन के दौरान प्रतिदिन कथा, भजन, आध्यात्मिक प्रवचन और सामाजिक संदेश के साथ-साथ भक्तों के लिए अल्पाहार व प्रसादी वितरण का भी प्रबंध रहा।

सात दिवसीय कथा के मुख्य प्रसंग

  • प्रथम दिवस: भूमि पूजन एवं गणेश वंदना से कथा का शुभारंभ।

  • द्वितीय दिवस: शिव विवाह प्रसंग — मातृशक्ति की सामाजिक भूमिका पर विशेष प्रवचन।

  • तृतीय दिवस: त्रिपुरासुर वध — अधर्म पर धर्म की विजय का संदेश।

  • चतुर्थ दिवस: पार्वती तप एवं गणेश जन्म — संयम, सेवा और विवेक का महत्व।

  • पंचम दिवस: कामदेव दहन — इंद्रिय संयम व साधना की शक्ति।

  • षष्ठ दिवस: शिव तांडव — धर्म रक्षा का उद्घोष।

  • सप्तम दिवस: कैलाश मुक्ति का राष्ट्रधर्मी संकल्प

कथावाचक का संदेश

कथावाचक आचार्य प्रशांत तिवारी जी ने कहा:

“कैलाश केवल एक पर्वत नहीं, यह सनातन आत्मा का ध्रुव तारा है। जो शिव को चाहते हैं, उन्हें भारत की रक्षा करनी होगी।”

उन्होंने शिवभक्तों से मंदिरों से बाहर आकर राष्ट्र निर्माण और सांस्कृतिक चेतना के लिए सक्रिय होने का आह्वान किया।

संतजनों का मार्गदर्शन

  • गोपालदास महाराज (चंबल बरही): “कैलाश शिव का धाम है, वह परतंत्र नहीं हो सकता। धार्मिक जागरण के साथ राष्ट्रधर्म का संकल्प लेना ही सच्ची भक्ति है।”

  • अमरदास महाराज (पगलदास बाबा के शिष्य): “कैलाश के लिए आवाज उठाना महादेव को साक्षात पुकारना है।”

कैलाश मुक्ति का राष्ट्रीय संकल्प

भारत तिब्बत सहयोग मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष अर्पित एम. मुदगल ने कहा:

“यह केवल धार्मिक नहीं, बल्कि राष्ट्रीय और सांस्कृतिक जागरण का अभियान है। हम ‘मुक्त कैलाश, आज़ाद तिब्बत, सुरक्षित भारत’ के संकल्प को अंतरराष्ट्रीय मंच तक ले जाएंगे।”

समापन पर सामूहिक शंखनाद, भगवा ध्वज फहराते हुए ‘हर हर महादेव’ के जयघोष के साथ श्रद्धालुओं ने यह संकल्प दोहराया कि —
“जब तक कैलाश मुक्त नहीं, तब तक शिवभक्त मौन नहीं रहेगा।”

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