भोपाल, 08 अप्रैल (वेब वार्ता)। मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता को लागू करने को लेकर एक बार फिर गतिविधियां तेज हो गई हैं। राज्य में इस विषय पर ड्राफ्ट तैयार करने और अध्ययन की प्रक्रिया को गति दी जा रही है। संकेत हैं कि आगामी मानसून सत्र या उसके बाद विधानसभा में इससे संबंधित विधेयक पेश किया जा सकता है।
अन्य राज्यों के फैसलों से मिली गति
हाल के घटनाक्रमों ने इस मुद्दे को नई गति दी है। गुजरात में मार्च 2026 में समान नागरिक संहिता से जुड़ा विधेयक पारित होने और असम में चुनावी चर्चाओं के बाद मध्यप्रदेश में भी इस विषय पर सक्रियता बढ़ी है। इससे पहले उत्तराखंड इस कानून को लागू करने वाला पहला राज्य बन चुका है।
चरणबद्ध रणनीति पर काम
भारतीय जनता पार्टी इस कानून को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की रणनीति पर काम कर रही है। माना जा रहा है कि वर्ष 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले अधिकतर भाजपा शासित राज्यों में इसे लागू करने का लक्ष्य रखा गया है।
पार्टी लंबे समय से समान नागरिक संहिता को अपने प्रमुख मुद्दों में शामिल करती रही है और इसे राष्ट्रीय एकता, समानता तथा महिला सशक्तिकरण से जोड़कर देखती है।
पहले भी हो चुकी है पहल
राज्य में यह पहल नई नहीं है। वर्ष 2022 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसके लिए समिति गठन की बात कही थी, लेकिन यह प्रयास आगे नहीं बढ़ सका। वर्ष 2023 में नई सरकार बनने के बाद भी यह विषय प्रारंभिक चर्चा तक सीमित रहा।
अब गृह विभाग स्तर पर उत्तराखंड और गुजरात के मॉडल का अध्ययन करते हुए ड्राफ्ट तैयार करने की प्रक्रिया को तेज किया गया है।
केंद्र नेतृत्व का समर्थन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह कई मंचों से समान नागरिक संहिता को संविधान की भावना बताते हुए इसे लागू करने की वकालत कर चुके हैं।
अमित शाह ने इसे सरकार की प्रतिबद्धता बताते हुए मध्यप्रदेश में भी लागू करने का संकेत दिया था, जिसके बाद इस विषय पर राजनीतिक चर्चा और तेज हो गई है।
लागू करना आसान नहीं
विशेषज्ञों के अनुसार, मध्यप्रदेश जैसे विविधता वाले राज्य में समान नागरिक संहिता लागू करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। विभिन्न धर्मों के अलग-अलग व्यक्तिगत कानून, सामाजिक-सांस्कृतिक विविधता और आदिवासी समुदाय पर संभावित प्रभाव जैसे मुद्दे इसमें प्रमुख बाधा बन सकते हैं।
राज्य की लगभग 22 प्रतिशत आदिवासी आबादी को ध्यान में रखते हुए इस कानून में विशेष प्रावधान या छूट देने की संभावना भी जताई जा रही है, जैसा कि अन्य राज्यों में किया गया है।
क्या है प्रक्रिया
समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए राज्य सरकार को कई चरणों से गुजरना होता है। इसके तहत विशेषज्ञ समिति का गठन कर विभिन्न व्यक्तिगत कानूनों का अध्ययन किया जाता है। इसके बाद विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और संपत्ति से जुड़े प्रावधानों का मसौदा तैयार किया जाता है।
मसौदे को मंत्रिमंडल की मंजूरी मिलने के बाद विधानसभा में प्रस्तुत किया जाता है और पारित होने के पश्चात यह कानून के रूप में लागू होता है।
फिलहाल मध्यप्रदेश में यह प्रक्रिया प्रारंभिक लेकिन तेज चरण में है और आने वाले समय में इस पर ठोस निर्णय सामने आने की संभावना है।



