भोपाल/उज्जैन, डेस्क | वेब वार्ता
हिंदू नववर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, विक्रम संवत 2083 और गुड़ी पड़वा के पावन अवसर पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भगवान सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर दिन की शुरुआत की। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेशवासियों को नववर्ष की शुभकामनाएं देते हुए भारतीय संस्कृति और उज्जैन की ऐतिहासिक परंपराओं का उल्लेख किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उज्जैन सदियों से धर्म, ज्ञान, विज्ञान और संस्कृति का प्रमुख केंद्र रहा है और सम्राट विक्रमादित्य की परंपराएं आज भी समाज को प्रेरित कर रही हैं।
विक्रमोत्सव को मिली राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान
मुख्यमंत्री ने बताया कि उज्जैन में आयोजित विक्रमोत्सव अब राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बना रहा है। उन्होंने कहा कि भारतीय पंचांग और प्रमुख पर्व विक्रम संवत पर आधारित हैं, जो हमारी सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। विक्रमोत्सव–2026 का आयोजन 15 फरवरी से शुरू होकर 19 मार्च तक चलेगा, जिसमें विभिन्न सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
प्रदेशभर में आयोजित होंगे कार्यक्रम
| कार्यक्रम | विवरण |
|---|---|
| तारीख | 19 मार्च 2026 |
| समय | सुबह 10 बजे |
| आयोजन स्थल | सभी जिला मुख्यालय |
| मुख्य गतिविधि | सूर्य उपासना व सांस्कृतिक कार्यक्रम |
मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि सृष्टि आरंभ दिवस और वर्ष प्रतिपदा के अवसर पर प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों में सूर्य उपासना और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
- जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित
- प्रदेशभर में एकसाथ सांस्कृतिक आयोजन
- भारतीय परंपराओं के प्रचार-प्रसार पर जोर
जनप्रतिनिधियों की होगी भागीदारी
राज्यभर में आयोजित कार्यक्रमों में जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई है। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ग्वालियर में, उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा मंदसौर में और राजेंद्र शुक्ला रीवा में आयोजित कार्यक्रमों में शामिल होंगे। इसके अलावा कई मंत्री अपने-अपने प्रभार वाले जिलों में कार्यक्रमों की अगुवाई करेंगे।
भारतीय संस्कृति को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास
विक्रमोत्सव के तहत संगीत, नृत्य, नाटक, लोककला और संगोष्ठियों के माध्यम से सम्राट विक्रमादित्य की परंपरा और भारतीय संस्कृति को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। उज्जैन में बड़ी संख्या में नागरिकों, विद्यार्थियों और पर्यटकों की भागीदारी से शहर की सांस्कृतिक पहचान और मजबूत हुई है।
पुरस्कार और वैश्विक पहचान
| वर्ष | सम्मान |
|---|---|
| 2025 | “लॉन्गस्टैंडिंग आईपी ऑफ द ईयर” |
| 2025 | WOW अवॉर्ड |
उल्लेखनीय है कि विक्रमोत्सव 2025 को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई सम्मान मिल चुके हैं, जिससे इसकी वैश्विक पहचान मजबूत हुई है। आने वाले समय में यह उत्सव भारतीय संस्कृति के वैश्विक प्रसार का सशक्त माध्यम बन सकता है।
निष्कर्ष
हिंदू नववर्ष के अवसर पर आयोजित ये कार्यक्रम न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक हैं, बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपराओं को सशक्त बनाने का माध्यम भी हैं। राज्य सरकार का उद्देश्य इन आयोजनों के जरिए सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाना और वैश्विक स्तर पर इसकी पहचान को और मजबूत करना है।
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