जबलपुर, ब्यूरो रिपोर्ट | वेब वार्ता
MP High Court: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने पर्यावरण संरक्षण से जुड़े एक अहम जनहित मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट कहा कि पर्यावरणीय मानकों के उल्लंघन को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट पर कोर्ट की सख्ती
यह आदेश मुख्य न्यायाधीश श्री संजय सचदेवा एवं न्यायमूर्ति श्री विनय सराफ की खंडपीठ द्वारा पारित किया गया। अदालत को बताया गया कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने 5 दिसंबर 2025 को संबंधित स्थल का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के बाद तैयार रिपोर्ट में पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन को रेखांकित करते हुए सुधारात्मक उपाय सुझाए गए थे।
सुधारात्मक उपायों का पालन अनिवार्य
हाईकोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए कि समिति द्वारा प्रतिवादी क्रमांक-5 मेसर्स लाइवस्टॉक फूड प्रोसेसर्स प्राइवेट लिमिटेड के लिए सुझाए गए सभी सुधारात्मक उपायों का अनिवार्य रूप से पालन किया जाए। कोर्ट ने कहा कि रिपोर्ट के अनुरूप तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित हो और किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार्य नहीं होगी।
वैधानिक अनुमतियों पर समयबद्ध निर्णय
अदालत ने यह भी निर्देशित किया कि यदि सुधारात्मक कार्यों के लिए किसी प्रकार की वैधानिक अनुमति की आवश्यकता हो, तो संबंधित प्राधिकरण के समक्ष तत्काल आवेदन प्रस्तुत किया जाए। साथ ही कोर्ट ने संबंधित विभागों को दो दिन के भीतर कानून के अनुसार निर्णय लेने के निर्देश दिए।
रिटेनिंग वॉल व सीसीटीवी पर पहले ही आदेश
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा सुझाई गई रिटेनिंग वॉल (संरक्षण दीवार) यदि किसी सरकारी एजेंसी द्वारा बनाई जानी है, तो संबंधित विभाग तत्काल कदम उठाए। उल्लेखनीय है कि 8 जनवरी 2026 को अदालत ने भोपाल स्लॉटर हाउस की दीवार निर्माण एवं लाइव सीसीटीवी कैमरे लगाने के भी आदेश दिए थे।
याचिकाकर्ता और प्रतिवादी पक्ष
- याचिकाकर्ता: दयोदय महासंघ
- राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ
- जन जागृति समिति
- प्रतिवादी: मध्यप्रदेश शासन (शहरी प्रशासन विभाग)
- राज्य स्तरीय मॉनिटरिंग समिति (बूचड़खाने)
- मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
- नगर निगम भोपाल
- मेसर्स लाइवस्टॉक फूड प्रोसेसर्स प्राइवेट लिमिटेड
याचिकाकर्ताओं ने अदालत के समक्ष पर्यावरण प्रदूषण, नियमों के उल्लंघन और जनहित से जुड़े गंभीर मुद्दे उठाए थे। कोर्ट ने इन तथ्यों को गंभीर मानते हुए सख्त निर्देश जारी किए।
हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 9 फरवरी 2026 को तय की है। न्यायालय का यह आदेश पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण के क्षेत्र में दूरगामी प्रभाव वाला माना जा रहा है।
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