इंदौर, 04 अप्रैल (वेब वार्ता)। देश का सबसे स्वच्छ शहर माने जाने वाला Indore अब एक ऐसे कड़वे सच का सामना कर रहा है, जो समाज के भीतर छिपी गहरी समस्याओं को उजागर करता है। आधुनिकता और विकास की चमक के पीछे यहां हजारों महिलाएं घरेलू हिंसा का शिकार हो रही हैं।
महिला बाल विकास विभाग के वन स्टॉप सेंटर (सखी) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों ने स्थिति की गंभीरता को सामने ला दिया है। पिछले एक वर्ष में बड़ी संख्या में महिलाएं अपने ही परिवार के खिलाफ मदद मांगने के लिए आगे आई हैं।
घरेलू हिंसा के मामलों में चिंताजनक उछाल
अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच कुल 5266 महिलाएं सहायता के लिए वन स्टॉप सेंटर पहुंचीं। इनमें से 5078 मामले सीधे तौर पर घरेलू हिंसा से जुड़े पाए गए। आंकड़ों के अनुसार, हर 10 में से लगभग 9 महिलाएं अपने ही घर में शारीरिक, मानसिक या आर्थिक प्रताड़ना झेल रही हैं।
यह स्थिति उस शहर के लिए चिंता का विषय है, जो शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वच्छता के क्षेत्र में देशभर में पहचान बना चुका है।
समझौते के बाद भी जारी अत्याचार
आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि कई महीनों में पीड़ित महिलाओं की संख्या 450 से 550 के बीच रही। प्रशासन और पुलिस की पहल पर कई मामलों में परिवारों के बीच समझौते भी हुए, लेकिन ये समाधान स्थायी साबित नहीं हो सके।
अक्सर देखा गया है कि समझौते के बाद भी प्रताड़ना जारी रहती है और कई मामले बाद में फिर से शिकायत के रूप में सामने आते हैं, जो अंततः जनसुनवाई तक पहुंच जाते हैं।
शिक्षित और कामकाजी महिलाएं भी प्रभावित
विशेषज्ञों के अनुसार, घरेलू हिंसा का दायरा केवल आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग तक सीमित नहीं है। शिक्षित और नौकरीपेशा महिलाएं भी बड़ी संख्या में इसका शिकार हो रही हैं।
नवविवाहिताओं से लेकर बुजुर्ग महिलाओं तक, हर आयु वर्ग की महिलाएं अपनी पीड़ा लेकर सहायता केंद्र पहुंच रही हैं। समाज में घरेलू विवाद को निजी मामला मानने की प्रवृत्ति के कारण अक्सर पीड़िताओं को समर्थन नहीं मिल पाता। कई बार आवाज उठाने पर महिलाओं को ही दोषी ठहराया जाता है।
नवंबर में सबसे ज्यादा मामले दर्ज
आंकड़ों के अनुसार, नवंबर 2025 में सर्वाधिक 522 मामले सामने आए। इसके अलावा दिसंबर में 457 और जनवरी 2026 में 465 मामलों की पुष्टि हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि ये केवल दर्ज मामलों की संख्या है, जबकि वास्तविक आंकड़ा इससे कहीं अधिक हो सकता है, क्योंकि कई महिलाएं सामाजिक दबाव के चलते शिकायत दर्ज नहीं करातीं।
आंकड़ों में झलकती सच्चाई
- कुल 5266 महिलाओं ने एक वर्ष में सहायता मांगी
- 5078 मामले घरेलू हिंसा से जुड़े
- 188 मामले अन्य श्रेणियों में दर्ज
- नवंबर में सर्वाधिक 522 शिकायतें दर्ज
इंदौर के ये आंकड़े न केवल महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा करते हैं, बल्कि यह भी संकेत देते हैं कि सामाजिक सोच और पारिवारिक संरचना में बदलाव की सख्त जरूरत है। घरेलू हिंसा जैसी समस्याओं से निपटने के लिए केवल कानून नहीं, बल्कि समाज की मानसिकता में परिवर्तन भी उतना ही आवश्यक है।



