भोपाल, मुकेश शर्मा | वेब वार्ता
मध्य प्रदेश गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल (हाउसिंग बोर्ड) में फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर पद हासिल करने का एक गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि प्रभारी अपर आयुक्त महेंद्र सिंह ने अनुसूचित जनजाति (एसटी) का कथित फर्जी प्रमाण पत्र लगाकर नौकरी प्राप्त की और नियमों को दरकिनार कर उच्च पद तक पहुंचे।
ओबीसी से एसटी बनने पर उठे सवाल
सूत्रों के अनुसार महेंद्र सिंह मूल रूप से कनासिया जाति से संबंध रखते हैं, जो मध्य प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) में आती है। इसके बावजूद उन्होंने स्वयं को भिलाला (एसटी) दर्शाते हुए सरकारी सेवा प्राप्त की। दस्तावेजों से यह संकेत मिलता है कि प्रस्तुत किया गया जाति प्रमाण पत्र संबंधित तहसीलों के अभिलेखों में दर्ज ही नहीं है।
आरटीआई और प्रशासनिक पत्रों से खुलासा
सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त जवाबों में इंदौर और सीहोर तहसील कार्यालयों ने स्पष्ट किया कि संबंधित प्रमाण पत्र उनके रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं है। वर्ष 2013, 2023 और 2024 में जारी पत्रों में भी जाति प्रमाण पत्र की वैधता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाए गए हैं।
| विवरण | जानकारी | स्थिति |
|---|---|---|
| नाम | महेंद्र सिंह | प्रभारी अपर आयुक्त |
| मूल जाति | कनासिया (ओबीसी) | दर्ज |
| दावा की गई जाति | भिलाला (एसटी) | विवादित |
| प्रमाण पत्र रिकॉर्ड | तहसील अभिलेखों में नहीं | संदिग्ध |
| स्वीकृत पद | अपर आयुक्त | 3 पद स्वीकृत |
- आरटीआई जवाबों में प्रमाण पत्र अमान्य पाया गया।
- रिकॉर्ड में जाति प्रमाण पत्र दर्ज नहीं।
- नियमानुसार अपर आयुक्त के केवल तीन पद स्वीकृत।
नियम विरुद्ध पदोन्नति और लेन-देन के आरोप
आरोप है कि महेंद्र सिंह ने अपर आयुक्त पद का प्रभार पाने के लिए कथित रूप से 10 लाख रुपये की अनुचित भेंट देकर नियम विरुद्ध आदेश जारी करवाया। वर्ष 2024 में जारी आदेश के आधार पर उन्हें अपर आयुक्त-1 का प्रभार सौंपा गया, जिसे नियमों के विरुद्ध बताया जा रहा है।
नियमितीकरण को लेकर विवाद
वर्ष 2025 में मंडल की बैठक में पद के नियमितीकरण के लिए भी कथित रूप से नियमों को दरकिनार कर प्रस्ताव पारित कराया गया। इस प्रक्रिया में मुख्य प्रशासनिक अधिकारी की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
अधिकारियों के अलग-अलग बयान
मामले पर मुख्य प्रशासनिक अधिकारी तृप्ती श्रीवास्तव ने बताया कि मंडल स्तर पर जांच कर रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। वहीं पीआरओ एवं प्रभारी अधिकारी महेंद्र सिंह ने कहा कि प्रकरण की जांच विधि अधिकारी कर रहे हैं।
कार्रवाई न होने पर उठे सवाल
सवाल यह भी उठ रहा है कि जब अन्य जिलों में फर्जी जाति प्रमाण पत्र मामलों में एफआईआर और बर्खास्तगी की कार्रवाई हो चुकी है, तो इस प्रकरण में अब तक कठोर कदम क्यों नहीं उठाए गए। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि शिकायतों को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
निष्कर्ष
हाउसिंग बोर्ड में सामने आया यह मामला प्रशासनिक पारदर्शिता और आरक्षण व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि सामाजिक न्याय प्रणाली के साथ भी बड़ा अन्याय है। अब सभी की निगाहें शासन स्तर पर होने वाली अंतिम जांच और कार्रवाई पर टिकी हैं।
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