राजस्व विभाग की साजिश से तबाही की कगार पर एक परिवार: SDM नरेश चंद्र गुप्ता और भू-माफिया के खिलाफ लोकायुक्त में शिकायत दर्ज

ग्वालियर, मुकेश शर्मा (वेब वार्ता)। मध्य प्रदेश में अफसरशाही और भू-माफिया के गठजोड़ की गंध तेज हो रही है। ग्वालियर की तहसील मुरार के ग्राम बेरजा में एक गरीब परिवार की कृषि भूमि को फर्जी दस्तावेज तैयार कर हड़पने का मामला सामने आया है। फरियादी गौरीशंकर ने तत्कालीन SDM मुरार नरेश चंद्र गुप्ता और उनके रीडर कुलदीप बघेल पर आरोप लगाते हुए पुलिस अधीक्षक ग्वालियर एवं लोकायुक्त SP को शपथ पत्र पर शिकायत सौंपी है। फरियादी का कहना है कि राजस्व न्यायालय से रजिस्ट्री कार्यालय तक पूरा तंत्र भू-माफियाओं की जेब में है।

फर्जी दस्तावेजों से हड़पी जमीन: 2009 में खरीदी, 2025 में निरस्त

फरियादी गौरीशंकर ने बताया कि उन्होंने अपनी पत्नी स्व. श्रीमती राजकुमारी के नाम से 2009 में ग्राम बेरजा में कृषि भूमि खरीदी थी (विक्रय ग्रंथ क्रमांक 20345, दिनांक 26 मार्च 2009)। लेकिन भू-माफियाओं ने रजिस्ट्री कार्यालय में कर्मचारियों से सांठगांठ कर दस्तावेजों में कूट रचना की। कंप्यूटर टाइप शब्दों को हटाकर हाथ से नए सर्वे नंबर और रकबा दर्ज किया गया, जिससे जमीन का रकबा 7.782 हेक्टेयर से घटाकर 6.846 हेक्टेयर कर दिया गया।

इस फर्जी दस्तावेजों को आधार बनाकर राजस्व न्यायालय में झूठा प्रकरण पेश किया गया, और फरियादी की पत्नी का वैध नामांतरण निरस्त करा लिया गया। गौरीशंकर ने आरोप लगाया कि SDM गुप्ता और रीडर बघेल ने आरोपियों से सांठगांठ कर 4 अगस्त 2025 को उनके पक्ष में आदेश पारित किया, जबकि कलेक्टर ग्वालियर ने 24 फरवरी 2025 को पुनरावलोकन की अनुमति दी थी।

फरियादी का आरोप: “धमकियां मिल रही, जीवन खतरे में”

गौरीशंकर ने कहा, “मेरी पत्नी के नाम की वैध जमीन को दस्तावेजों से काट-छांट कर हड़प लिया गया। अब मेरा परिवार रोज धमकियों के साए में जी रहा है। आरोपी बटाईदार को धमकाते हैं कि विरोध किया तो हरिजन एक्ट में फंसा देंगे।” उन्होंने शासन-प्रशासन से आर्थिक अपराध शाखा से निष्पक्ष जांच और कठोर कार्रवाई की मांग की।

SDM का जवाब: “मामला जानकारी में नहीं, दस्तावेज भेजें”

पूर्व SDM नरेश चंद्र गुप्ता ने कहा, “मामला मेरी जानकारी में नहीं है। यदि दस्तावेज भेजें तो बता सकता हूं।”

पुलिस की गजब जांच: थाने ने आवेदन लिया, लेकिन जांच नहीं

फरियादी महाराजपुरा थाने पहुंचा, लेकिन बीट प्रभारी ने आवेदन लेने से इनकार कर सुप्रीम कोर्ट का हवाला दिया कि जमीन मामलों में पुलिस कुछ नहीं कर सकती। जब धोखाधड़ी का जिक्र किया, तो आवेदन लिया लेकिन पत्र थमाकर कहा कि मामला बिजौली थाने का है। फरियादी ने सवाल उठाया, “क्या पुलिस शून्य पर केस दर्ज कर बिजौली नहीं भेज सकती थी?”

यह मामला भ्रष्टाचार की दलदल को उजागर करता है। यदि अफसर फर्जी दस्तावेजों से जमीन हड़पने लगें, तो आम जनता न्याय कहां मांगे?

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