ग्वालियर, वेब वार्ता ब्यूरो | वेब वार्ता
Gwalior Kavi Sammelan के अंतर्गत पूर्व केंद्रीय मंत्री माधवराव सिंधिया की 81वीं जयंती के अवसर पर दीनदयाल नगर में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। नागरिक मंच के तत्वावधान में भाजपा नेता दिनेश शर्मा के संयोजन में आयोजित इस कार्यक्रम में देश के विभिन्न हिस्सों से आए कवियों ने ओज, श्रृंगार, हास्य-व्यंग्य और गीतों की प्रस्तुति देकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। देर रात तक चले इस कवि सम्मेलन में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित रहे और कवियों की प्रस्तुतियों का भरपूर आनंद लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत स्वर्गीय माधवराव सिंधिया की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर की गई। इसके बाद मां सरस्वती की पूजा और दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ हुआ। Gwalior Kavi Sammelan में साहित्य और संस्कृति की विविध रंगत देखने को मिली, जिसमें ओज, हास्य और भावपूर्ण गीतों का सुंदर संगम प्रस्तुत किया गया।
- कार्यक्रम: Gwalior Kavi Sammelan
- अवसर: माधवराव सिंधिया की 81वीं जयंती
- स्थान: दीनदयाल नगर, ग्वालियर
- आयोजक: नागरिक मंच
- मुख्य आकर्षण: देशभर के कवियों की काव्य प्रस्तुति
कवि सम्मेलन का हुआ भव्य शुभारंभ
Gwalior Kavi Sammelan का शुभारंभ पूर्व निदेशक प्रेमचंद सृजन पीठ उज्जैन जगदीश तोमर, जीवाजी विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. राजकुमार आचार्य तथा पूर्व विधायक रमेश अग्रवाल द्वारा स्वर्गीय माधवराव सिंधिया की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर किया गया। इसके बाद मां सरस्वती की पूजा और दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम की शुरुआत की गई।
कार्यक्रम में विभिन्न शहरों से आए कवियों ने अपनी-अपनी रचनाओं के माध्यम से श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया।
कवियों की प्रस्तुतियों ने बांधा समां
Gwalior Kavi Sammelan में मैनपुरी के गीतकार सुधीर निश्छल ने अपने गीतों के माध्यम से पूर्व केंद्रीय मंत्री माधवराव सिंधिया को याद करते हुए कहा:
“जिंदगी ये दो दिन का स्वप्न एक सलोना है,
पल में टूट जाता है, आदमी ये खिलौना है।”
इटावा से आए कवि अवनीश त्रिपाठी ने आधुनिक मोबाइल और इंटरनेट युग पर व्यंग्य करते हुए कहा:
“गूगल के दौर में पूछना बताना भूल बैठे हैं,
वीडियो कॉल चालू हुई तो घर आना जाना भूल बैठे हैं।”
श्रृंगार और भावनाओं की भी रही प्रस्तुति
Gwalior Kavi Sammelan में कवयित्री ऋतु चतुर्वेदी ने श्रृंगार रस की कविता प्रस्तुत करते हुए कहा:
“रोज उपवास कर मैं जिसे मांगती,
चीज थी कोई मैं उसके उपभोग की,
मेरा जूंठा भी मीठा था जिसके लिए,
आज उसके लिए कितनी खारी हूं मैं।”
मंच संचालन कर रहे कवि रामलखन शर्मा ने भी अपनी रचनाओं से श्रोताओं का मन मोह लिया। उन्होंने अपनी कविता में कहा:
“अब अपना भी थोड़ा सा व्यवहार बदल कर देखेंगे,
प्यार नहीं फल पाया तो व्यापार बदल कर देखेंगे।”
गीतकार रविंद्र रंजन की प्रस्तुति से समापन
कवि सम्मेलन के अंत में शिकोहाबाद से आए ख्यातनाम गीतकार रविंद्र रंजन ने अपनी रचना प्रस्तुत कर कार्यक्रम को नई ऊंचाई दी। उनकी पंक्तियां थीं:
“आज मंदिर में मदिरा पुजारी पिए,
बुझ गए इसलिए आरती के दिए।”
कार्यक्रम के अंत में आयोजक नागरिक मंच के संयोजक भाजपा नेता दिनेश शर्मा ने सभी अतिथियों, कवियों और श्रोताओं का आभार व्यक्त किया।
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