भोपाल, नादिर खान | वेब वार्ता
भोपाल गोमांस कांड: भोपाल में सामने आए बहुचर्चित गोमांस कांड ने अब प्रशासनिक दफ्तरों से निकलकर सड़कों का रुख कर लिया है। राजधानी के आधुनिक स्लॉटर हाउस से बड़ी मात्रा में कथित गोमांस की बरामदगी के बाद मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। महापौर उदित गर्ग, कांग्रेस और विभिन्न नागरिक संगठनों ने स्लॉटर हाउस के ठेकेदार असलम कुरैशी उर्फ असलम चमड़ा पर नारकोटिक्स टेस्ट कराने और मामले में तत्काल एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। चेतावनी दी गई है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो व्यापक आंदोलन किया जाएगा।
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क्या है भोपाल गोमांस कांड
यह पूरा मामला उस समय सामने आया जब भोपाल के 35 करोड़ रुपये की लागत से बने आधुनिक स्लॉटर हाउस से लगभग 26 टन अवैध मांस बरामद किया गया। प्रारंभिक जांच और लैब रिपोर्ट में इस मांस के गोमांस होने की पुष्टि होने के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया। आरोप है कि इस मांस की सप्लाई सरकारी नाम और दस्तावेजों के सहारे की जा रही थी। मामले में स्लॉटर हाउस के ठेकेदार असलम कुरैशी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।
राजनीतिक और सामाजिक संगठनों का विरोध

गोमांस कांड के सामने आने के बाद भोपाल में राजनीतिक उबाल देखने को मिला। कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने नगर निगम कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। कांग्रेस प्रदेश महासचिव अमित शर्मा के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने निगम कार्यालय का घेराव कर ज्ञापन सौंपा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
- महापौर उदित गर्ग द्वारा नारकोटिक्स टेस्ट की मांग
- ठेकेदार और अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज करने की मांग
- निगम कार्यालय के बाहर प्रतीकात्मक विरोध प्रदर्शन
नारकोटिक्स टेस्ट की मांग क्यों
प्रदर्शनकारियों और महापौर का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर अवैध गतिविधि सामान्य लापरवाही का नतीजा नहीं हो सकती। उनका आरोप है कि पूरे मामले के पीछे संगठित नेटवर्क और संदिग्ध गतिविधियां हो सकती हैं, जिसकी निष्पक्ष जांच के लिए नारकोटिक्स टेस्ट और वैज्ञानिक जांच जरूरी है। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि कहीं मांस तस्करी या अन्य अवैध कारोबार से जुड़े तार तो नहीं हैं।
प्रशासनिक जवाबदेही पर उठे सवाल
इस कांड के बाद नगर निगम की निगरानी व्यवस्था और अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि स्लॉटर हाउस के संचालन में लंबे समय से अनियमितताएं हो रही थीं, लेकिन समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं की गई। महापौर कार्यालय की ओर से बताया गया है कि पूरे मामले की गहन जांच जारी है और संबंधित कर्मचारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।
निष्कर्ष: आंदोलन की ओर बढ़ता विवाद
भोपाल गोमांस कांड अब केवल एक आपराधिक मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही का बड़ा प्रश्न बन चुका है। यदि समय रहते एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो आंदोलन तेज होने के संकेत मिल रहे हैं। आने वाले दिनों में यह मामला भोपाल की राजनीति और प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।
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