भिण्ड, मुकेश शर्मा | वेब वार्ता
महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर भिण्ड में प्रतिवर्ष आयोजित होने वाली भव्य शिव बारात का इस वर्ष भी सफल आयोजन किया गया। आयोजन के सफल समापन के बाद वरिष्ठ भाजपा नेता डॉ. रमेश दुबे ने शिव बारात आयोजन समिति, प्रशासन और श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह आयोजन अब भिण्ड की पहचान बन चुका है।
18वीं बार हुआ आयोजन, दिखा दोगुना उत्साह
डॉ. रमेश दुबे ने बताया कि इस वर्ष शिव बारात का 18वां आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं का उत्साह पिछले वर्षों की तुलना में कहीं अधिक देखने को मिला। उन्होंने कहा कि हर वर्ष आयोजन की भव्यता और व्यवस्थाओं में निरंतर सुधार किया जा रहा है, जिससे इसका स्वरूप और अधिक आकर्षक बनता जा रहा है।
आयोजन समिति की भूमिका रही अहम
डॉ. दुबे ने कहा कि शिव बारात आयोजन समिति के संयोजक श्याम नारायण बाजपेई सहित सभी सदस्यों की रणनीति, समर्पण और निरंतर प्रयासों से यह आयोजन नई ऊंचाइयों तक पहुंचा है। समिति द्वारा समय-समय पर जनता और प्रशासन के साथ समन्वय कर बेहतर रूपरेखा तैयार की जाती रही है।
- समयबद्ध योजना और व्यवस्थाएं
- प्रशासन के साथ बेहतर समन्वय
- जनभागीदारी को प्राथमिकता
- सुरक्षा और सुविधा पर विशेष ध्यान
गुरुदेव की छत्रछाया में सफल आयोजन
डॉ. दुबे ने कहा कि पूज्य गुरुदेव श्री श्री 1008 अवधूत महाराज जी, चिलोगा धाम की छत्रछाया में यह आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इसमें भिण्ड की जनता ने बाराती और घराती के रूप में सक्रिय सहभागिता निभाई।
प्रशासन और जनसहयोग का मिला पूरा साथ
उन्होंने बताया कि आयोजन को सफल बनाने में शासन, पुलिस प्रशासन, नगर पालिका, विद्युत विभाग, पत्रकार जगत एवं अन्य विभागों का विशेष योगदान रहा। सभी विभागों के सहयोग से कार्यक्रम शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ।
- पुलिस व प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था
- नगर पालिका की साफ-सफाई व्यवस्था
- विद्युत विभाग की निर्बाध आपूर्ति
- मीडिया का सकारात्मक सहयोग
संस्कृति संरक्षण का संदेश
डॉ. रमेश दुबे ने कहा कि शिव बारात जैसे आयोजन हमारी सनातन संस्कृति और परंपरा के प्रतीक हैं। इन्हें संरक्षित करना और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि समाज को अपनी सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करना चाहिए।
निष्कर्ष
भिण्ड में आयोजित भव्य शिव बारात अब धार्मिक आयोजन के साथ-साथ सांस्कृतिक पहचान का रूप ले चुकी है। आयोजन समिति, प्रशासन और जनता के सहयोग से यह परंपरा निरंतर सशक्त होती जा रही है। आने वाले वर्षों में इसे और भव्य बनाने का संकल्प भी दोहराया गया है।
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