हिसार, 05 अप्रैल (वेब वार्ता)। हरियाणा के कुम्हारिया गांव निवासी अंकित जांगड़ा की रूस में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद उसका शव शनिवार को ताबूत में गांव पहुंचा। शव की हालत कंकालनुमा थी, जिसे देखकर परिजनों का दर्द फूट पड़ा और पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई।
करीब 14 माह पहले रोजगार की तलाश में रूस गए अंकित के इस तरह लौटने की किसी ने कल्पना नहीं की थी। अंतिम दर्शन के दौरान परिजनों की चीख-पुकार से माहौल गमगीन हो गया। बाद में दोपहर में उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया।
जबरन युद्ध में भेजे जाने का आरोप
मृतक के परिजनों का आरोप है कि अंकित को धोखे से रूस में सेना में भर्ती कर युद्ध क्षेत्र में भेजा गया। अंकित के भाई रघुबीर ने बताया कि उसने पहले ही जानकारी दी थी कि उसे जबरन युद्ध में धकेला जा रहा है। पिछले सात महीनों से उससे संपर्क नहीं हो पा रहा था, जिससे अनहोनी की आशंका बढ़ गई थी।
परिवार ने उसकी सुरक्षित वापसी के लिए दिल्ली में धरना भी दिया, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
ताबूत में मिली सेना की वर्दी
अंकित का शव जिस ताबूत में आया, उसमें रूसी सेना की वर्दी भी रखी गई थी। इससे परिजनों में आक्रोश फैल गया और उन्होंने अंतिम संस्कार के दौरान उस वर्दी को भी जला दिया।
ठगी का जाल, कई युवक फंसे
गांव के ही सोनू ने बताया कि वह भी स्टडी वीजा पर रूस गया था, लेकिन ठगों के जाल में नहीं फंसा और सुरक्षित लौट आया। उसके अनुसार, एक महिला ने अंकित, विजय पूनिया सहित कई भारतीय युवकों को बेहतर नौकरी का लालच देकर अपने जाल में फंसाया और बाद में उन्हें जबरन सेना में भर्ती करा दिया।
पढ़ाई के लिए गया था अंकित
परिजनों के अनुसार, अंकित 12वीं पास करने के बाद 14 फरवरी 2025 को स्टडी वीजा पर रूस गया था। वह मॉस्को में पढ़ाई के साथ-साथ पार्ट-टाइम काम कर परिवार की आर्थिक मदद करना चाहता था।
विजय पूनिया अब भी लापता
अंकित के साथ रूस गए विजय पूनिया का अब तक कोई सुराग नहीं मिला है। परिवार को आशंका है कि वह भी इसी तरह की परिस्थितियों में फंसा हो सकता है।
वीडियो में लगाई थी मदद की गुहार
सितंबर 2025 में सामने आए एक वीडियो में अंकित ने अन्य भारतीय युवकों के साथ कहा था कि उन्हें धोखे से सेना में भर्ती कर युद्ध क्षेत्र में भेजा जा रहा है। वीडियो में उसने भारत सरकार से मदद की गुहार लगाते हुए कहा था, “बचा लो, हम कभी भी मारे जा सकते हैं।”
प्रशासन से न्याय की मांग
गांव के सरपंच सुरेश सिंह ने बताया कि पूरे गांव के लोग पीड़ित परिवार के साथ खड़े हैं। उन्होंने राज्य और केंद्र सरकार से मामले की गंभीर जांच और अन्य फंसे युवकों को सुरक्षित वापस लाने की मांग की है।
यह घटना विदेश में रोजगार के नाम पर हो रही ठगी और मानव तस्करी के खतरनाक जाल को उजागर करती है, जिसने एक परिवार से उसका सहारा छीन लिया।



