नई दिल्ली, नेशनल वार्ता | वेब वार्ता
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र के बदलते स्वरूप की सराहना करते हुए कहा कि कभी माओवादी हिंसा के लिए पहचाना जाने वाला यह इलाका अब विकास, शांति और स्थानीय लोगों के बढ़ते आत्मविश्वास का प्रतीक बन गया है। उन्होंने 7 से 9 फरवरी के बीच आयोजित ‘बस्तर पंडुम’ विशेष उत्सव को सांस्कृतिक विरासत और जनजातीय पहचान को सशक्त करने वाला महत्वपूर्ण आयोजन बताया।
बस्तर पंडुम उत्सव को बताया सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि बस्तर पंडुम उत्सव के माध्यम से क्षेत्र की समृद्ध संस्कृति, परंपराएं और जनजातीय विरासत देश-दुनिया के सामने प्रस्तुत हुई हैं। इस आयोजन में स्थानीय कला, लोकनृत्य, संगीत और पारंपरिक जीवनशैली की झलक देखने को मिली, जिससे क्षेत्र की पहचान को नई मजबूती मिली है।
उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन न केवल सांस्कृतिक संरक्षण में सहायक होते हैं, बल्कि स्थानीय समुदायों को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने में भी अहम भूमिका निभाते हैं।
सोशल मीडिया के जरिए साझा किया संदेश
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपने संदेश में कहा कि पहले बस्तर का नाम सुनते ही माओवाद, हिंसा और पिछड़ेपन की छवि उभरती थी, लेकिन अब परिस्थितियां पूरी तरह बदल चुकी हैं। आज यह क्षेत्र विकास और सकारात्मक बदलाव का उदाहरण बन रहा है।
उन्होंने बस्तर पंडुम से जुड़ी कुछ तस्वीरें भी साझा कीं, जिनमें स्थानीय कलाकारों और जनजातीय समाज की सांस्कृतिक झलक देखने को मिली।
बस्तर के बदलाव की प्रमुख विशेषताएं
| क्षेत्र | पहले की स्थिति | वर्तमान स्थिति |
|---|---|---|
| सुरक्षा | माओवादी हिंसा | शांति और स्थिरता |
| विकास | सीमित सुविधाएं | तेज विकास कार्य |
| सामाजिक स्थिति | कम आत्मविश्वास | स्थानीय लोगों में बढ़ता भरोसा |
| संस्कृति | सीमित पहचान | राष्ट्रीय स्तर पर पहचान |
- बस्तर पंडुम से जनजातीय संस्कृति को मिला नया मंच
- पर्यटन और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा
- क्षेत्र की सकारात्मक छवि को मजबूती
शांति और प्रगति की कामना
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में कहा, “आज बस्तर विकास के साथ-साथ स्थानीय लोगों के बढ़ते आत्मविश्वास के लिए जाना जाता है। मेरी कामना है कि यहां का भविष्य शांति, प्रगति और सांस्कृतिक गौरव से परिपूर्ण हो।”
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार बस्तर और अन्य जनजातीय क्षेत्रों के समग्र विकास के लिए लगातार प्रयासरत है।
निष्कर्ष
प्रधानमंत्री द्वारा बस्तर पंडुम उत्सव की सराहना यह दर्शाती है कि बस्तर अब हिंसा की पहचान से निकलकर विकास, शांति और सांस्कृतिक गौरव की ओर बढ़ रहा है। ऐसे आयोजन न केवल क्षेत्र की छवि सुधारने में मदद करते हैं, बल्कि स्थानीय समुदायों के आत्मविश्वास और भविष्य की संभावनाओं को भी मजबूत बनाते हैं।
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