रायपुर, 02 अप्रैल (वेब वार्ता)।
छत्तीसगढ़ में सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर गंभीर लापरवाही सामने आई है। राज्य खाद्य आयोग द्वारा 21 जिलों में किए गए निरीक्षण में कई स्तरों पर खामियां उजागर होने के बाद संबंधित विभागों को सख्त निर्देश जारी किए गए हैं।
नवा रायपुर स्थित आयोग कार्यालय में आयोजित अंतरविभागीय समीक्षा बैठक में खाद्य, महिला एवं बाल विकास, स्कूल शिक्षा तथा आदिम जाति एवं अनुसूचित जनजाति विभाग के कार्यों की विस्तृत समीक्षा की गई।
छात्रावासों में भोजन व्यवस्था पर सवाल
निरीक्षण के दौरान बालक छात्रावासों में भोजन की गुणवत्ता और सामग्री आपूर्ति में सुधार की आवश्यकता पाई गई, जबकि कन्या छात्रावासों की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर रही। आयोग ने इस अंतर को गंभीरता से लेते हुए सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
इसके साथ ही 21 जिलों से निरीक्षण संबंधी अनुशंसाओं की रिपोर्ट समय पर प्रस्तुत न किए जाने पर आयोग ने नाराजगी जताई और जल्द रिपोर्ट देने को कहा है।
आंगनबाड़ी और स्कूलों में निर्देश
आयोग ने सभी आश्रम-छात्रावासों में दैनिक भोजन सूची और संपर्क नंबर स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करने के निर्देश दिए हैं, ताकि शिकायतों का त्वरित समाधान हो सके।
आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों की उपस्थिति को पोषण ट्रैकर में सही तरीके से दर्ज करने और आकस्मिक निरीक्षण के दौरान उसका मिलान सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
उचित मूल्य दुकानों पर सख्ती
उचित मूल्य दुकानों में अनियमितताओं को लेकर आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। दुकान समय पर नहीं खोलने, जरूरी जानकारी प्रदर्शित न करने और स्टॉक में गड़बड़ी पाए जाने पर संचालकों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
मध्यान्ह भोजन व्यवस्था संतोषजनक
मध्यान्ह भोजन योजना के तहत संचालित केंद्रीकृत रसोईघरों की व्यवस्था संतोषजनक पाई गई है। आयोग ने इनसे अधिक स्कूलों को जोड़ने की सिफारिश की है, ताकि अधिक बच्चों को गुणवत्तापूर्ण भोजन मिल सके।
साथ ही छात्रावासों और स्कूलों में भोजन की गुणवत्ता की निगरानी के लिए किसी छात्र को ‘मेस प्रभारी’ बनाने का सुझाव भी दिया गया है।
राज्य खाद्य आयोग के इन निर्देशों के बाद अब संबंधित विभागों पर सुधारात्मक कार्रवाई का दबाव बढ़ गया है और आने वाले समय में योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन की उम्मीद जताई जा रही है।



