रायपुर, 02 अप्रैल (वेब वार्ता)। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच छत्तीसगढ़ सरकार ने उर्वरकों की आपूर्ति को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है। आयातित खाद पर संभावित असर को देखते हुए केंद्र और राज्य सरकार ने मिलकर खरीफ सीजन 2026 के लिए व्यापक रणनीति तैयार की है, ताकि किसानों को समय पर पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध कराया जा सके।
सरकार के अनुसार खरीफ सीजन के लिए राज्य को 15.55 लाख मीट्रिक टन उर्वरक का लक्ष्य आवंटित किया गया है। वर्तमान में गोदामों और समितियों में लगभग 7.48 लाख मीट्रिक टन खाद उपलब्ध है, जिससे शुरुआती मांग को पूरा करने की तैयारी की गई है।
वितरण व्यवस्था को किया जा रहा मजबूत
हाल ही में आयोजित वर्चुअल बैठक में विभिन्न राज्यों में उर्वरकों की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था की समीक्षा की गई। इसमें छत्तीसगढ़ की स्थिति को संतोषजनक बताया गया और वितरण तंत्र को और मजबूत करने पर जोर दिया गया।
राज्य में यूरिया, डीएपी, एनपीके, एमओपी और एसएसपी जैसे प्रमुख उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने का दावा किया गया है।
वैकल्पिक उर्वरकों को बढ़ावा
संभावित कमी की स्थिति से निपटने के लिए सरकार किसानों को वैकल्पिक उर्वरकों के उपयोग के लिए भी प्रेरित कर रही है। इसके तहत जैविक खाद, हरी खाद और नैनो उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है।
सहकारी समितियों और निजी विक्रय केंद्रों के माध्यम से किसानों को जागरूक करने के लिए अभियान चलाया जा रहा है।
डिजिटल प्रणाली से पारदर्शिता
उर्वरक वितरण में पारदर्शिता लाने के लिए राज्य में जल्द ही ई-उर्वरक वितरण प्रणाली लागू की जाएगी। इस व्यवस्था के तहत किसानों को उनके पंजीकृत रकबे के अनुसार खाद उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे अनियमितताओं पर रोक लगाई जा सकेगी।
कालाबाजारी पर सख्ती
सरकार ने कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के लिए जिला स्तर पर उड़नदस्ता दल और निगरानी समितियों को सक्रिय करने के निर्देश दिए हैं।
अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी, ताकि किसानों को समय पर और उचित दर पर उर्वरक उपलब्ध हो सके।



