सोनीपत, रजनीकांत चौधरी | वेब वार्ता
विंटर स्ट्रोक के मिथक और सच्चाई:
सर्दियों का मौसम जहां ठंडी सुबहों, गर्म पेयों और त्योहारों की खुशियां लेकर आता है, वहीं यह सेहत से जुड़े कुछ गंभीर जोखिम भी बढ़ा देता है। ठंड के मौसम में स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाना अब डॉक्टरों के लिए एक अहम चिंता का विषय बन चुका है। कम तापमान शरीर की ब्लड सर्कुलेशन, ब्लड प्रेशर और हृदय प्रणाली पर सीधा असर डालता है, जिससे दिमाग तक रक्त प्रवाह बाधित होने की आशंका बढ़ जाती है।
सर्दियों में विंटर स्ट्रोक का खतरा क्यों बढ़ता है?
ठंड के कारण ब्लड वेसल्स सिकुड़ जाती हैं, जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है। इसके साथ ही ब्लड का गाढ़ा होना और हार्ट पर अतिरिक्त दबाव स्ट्रोक के जोखिम को बढ़ाता है। यह खतरा केवल अत्यधिक ठंड में ही नहीं, बल्कि हल्की सर्दी, अचानक तापमान में बदलाव या सुबह-सुबह ठंड में बाहर निकलने से भी बढ़ सकता है।
विंटर स्ट्रोक से जुड़े आम मिथक
- विंटर स्ट्रोक केवल बुजुर्गों को ही होता है
- सिर्फ बहुत ज्यादा ठंड में ही विंटर स्ट्रोक का खतरा रहता है
- घर के अंदर हीटर होने से खतरा पूरी तरह खत्म हो जाता है
- सर्दियों में विंटर स्ट्रोक को रोका नहीं जा सकता
क्या है इन मिथकों की सच्चाई?
मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, शालीमार बाग के न्यूरोलॉजी विभाग के डायरेक्टर डॉ. मनोज खनल के अनुसार, स्ट्रोक केवल उम्र से जुड़ी बीमारी नहीं है। हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, हार्ट डिजीज और अनहेल्दी लाइफस्टाइल वाले युवा और मिडिल एज लोग भी जोखिम में रहते हैं। ठंड खुद स्ट्रोक का कारण नहीं बनती, लेकिन यह शरीर में ऐसे फिजियोलॉजिकल बदलाव शुरू कर देती है, जो पहले से मौजूद बीमारियों के साथ मिलकर खतरा बढ़ा देते हैं।
इसके अलावा, घर के अंदर हीटर या रूम हीटिंग के कारण कम नमी और डिहाइड्रेशन भी अप्रत्यक्ष रूप से स्ट्रोक के जोखिम को बढ़ा सकते हैं। इसलिए केवल गर्म रहना ही नहीं, बल्कि पर्याप्त पानी पीना और शरीर को हाइड्रेट रखना भी उतना ही जरूरी है।
सर्दियों में दवाओं और लाइफस्टाइल को लेकर सतर्कता जरूरी
सर्दियों में ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल लेवल में उतार-चढ़ाव हो सकता है। ऐसे में नियमित मेडिकल चेकअप और डॉक्टर की सलाह के बिना दवाएं बंद करना या बदलना खतरनाक हो सकता है। ठंड के कारण फिजिकल एक्टिविटी कम हो जाती है, जिससे ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित होता है और स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है।
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विंटर स्ट्रोक से बचाव के आसान लेकिन असरदार उपाय
- ब्लड प्रेशर और शुगर लेवल की नियमित जांच
- घर के अंदर भी हल्की एक्सरसाइज और स्ट्रेचिंग
- गर्म सूप, हर्बल टी और पर्याप्त पानी का सेवन
- डाइट में फल, सब्जियां, होल ग्रेन्स और ओमेगा-3 शामिल करना
- बाहर जाते समय सिर, हाथ और पैरों को अच्छी तरह ढकना
- तनाव कम करने और पर्याप्त नींद पर ध्यान देना
स्ट्रोक के लक्षण पहचानना क्यों है जरूरी?
स्ट्रोक के लक्षण हमेशा बहुत स्पष्ट नहीं होते। चेहरे, हाथ या पैर में अचानक कमजोरी या सुन्नता, बोलने या समझने में दिक्कत, आंखों से कम दिखना, अचानक तेज सिरदर्द या संतुलन बिगड़ना जैसे संकेत दिखें तो तुरंत मेडिकल मदद लेनी चाहिए। शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करने से इलाज में देरी हो सकती है, जिससे जान को खतरा बढ़ जाता है।
निष्कर्ष: सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव
सर्दियों में स्ट्रोक का खतरा वास्तविक है, लेकिन सही जानकारी, मिथकों से दूरी और हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाकर इस जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। थोड़ी सी सतर्कता और समय पर इलाज से सर्दियों के मौसम में भी दिल और दिमाग दोनों को सुरक्षित रखा जा सकता है।
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