Wednesday, January 14, 2026
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यूपीएससी परीक्षाओं में अब अनिवार्य चेहरे का प्रमाणीकरण: AI तकनीक से सुरक्षित और तेज सत्यापन, फर्जी उम्मीदवारों पर लगाम

नई दिल्ली, विशेष संवाददाता | वेब वार्ता

संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने सभी उम्मीदवारों के लिए परीक्षा केंद्रों पर चेहरे का प्रमाणीकरण (फेस ऑथेंटिकेशन) अनिवार्य कर दिया है। यह कदम परीक्षा प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और तेज बनाने के साथ-साथ फर्जी उम्मीदवारों पर लगाम लगाने की दिशा में बड़ा प्रयास है। यूपीएससी, जो आईएएस, आईएफएस, आईपीएस और अन्य सिविल सेवा पदों के लिए प्रतिष्ठित परीक्षाएं आयोजित करता है, ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर इसकी घोषणा की है।

AI-सक्षम फेस ऑथेंटिकेशन: परीक्षा में नई सुरक्षा परत

यूपीएससी ने कहा है कि अब सभी उम्मीदवारों को परीक्षा केंद्र पर पहुंचने पर फेस ऑथेंटिकेशन से गुजरना होगा। इस तकनीक के जरिए उम्मीदवार की चेहरे की छवि को उनके पंजीकरण फॉर्म में जमा की गई तस्वीर से डिजिटल रूप से मिलान किया जाएगा। यह प्रक्रिया पूरी तरह कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) पर आधारित है और इससे सत्यापन का समय घटकर प्रति उम्मीदवार केवल 8 से 10 सेकंड रह गया है।

यूपीएससी अध्यक्ष अजय कुमार ने इस नई व्यवस्था की सराहना करते हुए कहा कि यह तकनीक न केवल सुरक्षा की एक अतिरिक्त परत जोड़ती है, बल्कि प्रवेश प्रक्रिया को काफी सरल और तेज बनाती है। इससे परीक्षा केंद्रों पर लंबी कतारें और देरी की समस्या काफी हद तक खत्म हो जाएगी।

पायलट प्रोजेक्ट की सफलता: NDA और CDS परीक्षा में आजमाया गया

यूपीएससी ने इस तकनीक का सफल परीक्षण पहले ही कर चुका है। 14 सितंबर 2025 को आयोजित एनडीए (राष्ट्रीय रक्षा अकादमी) और एनए (नौसेना अकादमी) II परीक्षा, 2025 तथा सीडीएस (संयुक्त रक्षा सेवा) II परीक्षा, 2025 के दौरान गुरुग्राम के चुनिंदा केंद्रों पर AI-सक्षम फेस ऑथेंटिकेशन का पायलट प्रोजेक्ट चलाया गया था। इस दौरान तकनीक ने उम्मीदवारों के चेहरे की छवियों को पंजीकरण फोटो से मिलाकर त्वरित और सुरक्षित सत्यापन किया।

पायलट की सफलता के बाद यूपीएससी ने इसे सभी परीक्षाओं में अनिवार्य कर दिया है। इससे परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और फर्जी उम्मीदवारों के प्रवेश पर पूरी तरह रोक लगेगी।

उम्मीदवारों के लिए महत्वपूर्ण बदलाव

  • सुरक्षा बढ़ी: फर्जी पहचान और नकल की संभावना लगभग खत्म।
  • समय की बचत: सत्यापन में 8-10 सेकंड, पहले की तुलना में काफी तेज।
  • तकनीकी विश्वसनीयता: AI आधारित मिलान से गलती की गुंजाइश नगण्य।
  • परीक्षा केंद्रों पर सुगमता: लंबी कतारों और देरी की समस्या कम।

यूपीएससी की अन्य महत्वपूर्ण पहलें

यूपीएससी लगातार परीक्षा प्रक्रिया को आधुनिक और पारदर्शी बनाने के लिए प्रयासरत है। हाल के वर्षों में डिजिटल एडमिट कार्ड, ऑनलाइन आवेदन, ई-मॉक टेस्ट और अब फेस ऑथेंटिकेशन जैसी तकनीकों को अपनाकर यह आयोग देश की सबसे विश्वसनीय भर्ती संस्था बना हुआ है।

प्रमुख तथ्य एक नजर में

विवरणजानकारी
नई व्यवस्थापरीक्षा केंद्रों पर फेस ऑथेंटिकेशन अनिवार्य
तकनीकAI-सक्षम चेहरे का प्रमाणीकरण
सत्यापन समय8-10 सेकंड प्रति उम्मीदवार
पायलट परीक्षाNDA, NA II और CDS II 2025 (गुरुग्राम केंद्र)
लाभसुरक्षा बढ़ी, फर्जी उम्मीदवारों पर रोक, तेज प्रक्रिया
घोषणायूपीएससी आधिकारिक वेबसाइट पर
निष्कर्ष: परीक्षा प्रक्रिया में नई पारदर्शिता और विश्वास

यूपीएससी का यह कदम परीक्षा प्रक्रिया को और अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और उम्मीदवार-अनुकूल बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। AI तकनीक से सत्यापन का समय कम होने के साथ फर्जी पहचान की संभावना लगभग खत्म हो गई है। इससे लाखों युवाओं का भविष्य सुरक्षित होगा और प्रतियोगी परीक्षाओं में विश्वास बढ़ेगा। सरकार और आयोग के इस प्रयास से न केवल परीक्षाएं निष्पक्ष होंगी, बल्कि प्रतिभाशाली उम्मीदवारों को उनका हक मिलने की गारंटी भी मजबूत होगी।

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