चेन्नई, 05 अप्रैल (वेब वार्ता)। तमिलनाडु की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ सामने आया है। विदुथलाई चिरुथिगल काची के अध्यक्ष थोल थिरुमावलवन ने 2026 के विधानसभा चुनाव में कट्टुमन्नारकोइल सीट से चुनाव नहीं लड़ने का ऐलान कर दिया है। उनके इस फैसले के साथ ही उनकी उम्मीदवारी को लेकर चल रही अटकलों पर विराम लग गया है।
थोल थिरुमावलवन ने कहा कि उन्होंने पहले वंचित और दबे-कुचले वर्गों की आवाज विधानसभा में उठाने की इच्छा जताई थी, लेकिन वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों और गठबंधन की रणनीति को ध्यान में रखते हुए उन्होंने यह निर्णय लिया है। उन्होंने बताया कि सांसद के रूप में दो वर्ष पूरे करने के बाद भी उनकी दीर्घकालिक सोच समाज के वंचित वर्गों के लिए काम करने की रही है।
जनहित को बताया प्राथमिकता
अपने राजनीतिक जीवन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उनके फैसले हमेशा जनहित को ध्यान में रखकर लिए गए हैं, न कि व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा के आधार पर। उन्होंने 2004 में पद छोड़ने और 2006 में अन्य नेताओं को अवसर देने के लिए पीछे हटने की बात भी दोहराई। थिरुमावलवन ने स्पष्ट किया कि वह उपमुख्यमंत्री पद की दौड़ में शामिल नहीं हैं और न ही किसी त्रिशंकु विधानसभा की संभावना को देखते हुए कोई रणनीति बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की अफवाहें उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने और गठबंधन को कमजोर करने के उद्देश्य से फैलाई जा रही हैं।
द्रमुक के दबाव की बात से इनकार
थोल थिरुमावलवन ने यह भी साफ किया कि उनकी उम्मीदवारी द्रमुक के किसी दबाव में नहीं रोकी गई है। उनके अनुसार, सीटों का बंटवारा सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के आधार पर किया जाता है। उन्होंने घोषणा की कि कट्टुमन्नारकोइल सीट से पार्टी की ओर से ज्योथिमणि को उम्मीदवार बनाया जाएगा, जो पूर्व नेता इलैयापेरुमल के छोटे पुत्र हैं। उन्होंने पार्टी में किसी भी प्रकार के मतभेद से इनकार करते हुए कहा कि सभी निर्णय पारदर्शिता के साथ लिए गए हैं।
2026 चुनाव को बताया निर्णायक
आगामी 2026 विधानसभा चुनाव को थोल थिरुमावलवन ने तमिलनाडु में दक्षिणपंथी ताकतों के खिलाफ निर्णायक लड़ाई करार दिया। उन्होंने कहा कि उनका मुख्य उद्देश्य द्रमुक के नेतृत्व वाले गठबंधन की जीत सुनिश्चित करना है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह गठबंधन 200 से अधिक सीटें जीतकर पुनः सत्ता में वापसी करेगा।
अंत में उन्होंने कहा कि वह कभी पद प्राप्त करने के लिए राजनीति में नहीं आए। उनके अनुसार, उनके पिछले निर्णय और त्याग इस बात का स्पष्ट प्रमाण हैं कि उनकी राजनीति का केंद्र हमेशा समाज और जनहित ही रहा है।



